By Yash Lohar, NSUI Leader

नरेंद्र मोदी की भाजपा के उदय के बाद सेकुलर शब्द को गाली का दर्जा दे दिया गया है, सेकुलर होने का अर्थ ही अब देशविरोधी एवं हिन्दुविरोधी होना है! आरएसएस के अफवाह तंत्र और दिग्भृमित युवाओं के दिमाग ने इस मानवीय सोच को इतने घाव दिए की आज लोग स्वयं को सेकुलर कहने में हिचकिचाने लगे है!
सेकुलर सोच अब राजनीती से लेकर व्यवहारिकता तक हर जगह हार का मुंह देख रही है! लेकिन में इस लेख के माध्यम से मेरे उन कॉलेज के मित्रो , बचपन के साथियो को और सभी संघी, मुसंघियोंजवाब देना चाहता हु जो धर्म निरपेक्षता को राष्ट्रद्रोह और कायरता की श्रेणी में रख चुके हे,
साथियो सेकुलर होने में क्या खराबी हे,?? सेकुलर तो हर इंसान अपने जन्म से होता है, क्या आप दो साल की उम्र में मुस्लिम, कटुए , ऊंच नीच जैसे शब्दों से वाकिफ थे??
कितने लोग आरएसएस, और मीम आदि के सम्पर्क में आने से पूर्व दूसरे मज़हब को घृणा से देखते थे??
कहते हे बच्चा भगवान का रूप होता है तो जब भगवान ने कट्टरता नही पाली तो आप क्यों राजनीती के चक्कर में भगवान के उस मूल स्वरूप को नष्ट कर रहे हे??,
आप बात करते हे राष्ट्रवाद की, कौन सा राष्ट्रवाद, ??और किसका राष्ट्रवाद??
पंडित बिस्मिल , आज़ाद, भगत सिंह, अशफ़ाफ़ ,नेहरू, गांधी सभी कट्टरता को अभिशाप कहते थे, ये लोग कभी सांप्रदायिक द्वेष के साथ खड़े नही रहे फिर आप किस राष्ट्रवाद का चोला ओढ़कर जहर फूंकते चल रहे हो!
असल में आप राम के नही नाथूराम के पक्ष मै हे, गोडसे ,गोल्वलगर, सावरकर के साथ खड़े हे आप लोग ,, में भगत सिंह, आज़ाद, विवेकानंद गांधी की सोच को लेकर आगे बढ़ रहा हु!
बताइये फिर असली राष्ट्रवादी और देशभक्त कौन हुआ, भगत सिंह, स्वामी विवेकानंद की सोच या सावरकर,, मोहन भागवत की सोच??
हे कोई जवाब गाली और गोली के अतिरिक्त??

इसीलिए छाती ठोक के कहता हां में सेकुलर हु, ! ना मुझे अजान से परेशानी है ना आरती से,
मेरा मज़हब हिंदुस्तान हे और जात हिन्दुस्तानी हे!

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