Environment वक़्त का गांधी होना

वक़्त का गांधी होना

5

कहते हे वक़्त के साथ सब बदल जाता हे ,

वक़्त ने आसमानी चमक व तानाशाही धमक को गर्त में पहुंचाया हे ,वक़्त के आगे  किसी की नही चली हे ,केहते हे समय बलवान होता हे ,,

लेकिन एक बात कहु इस बलवान समय को अगर किसी ने पराजित किया हे

,इस वक़्त की रफ्तार को किसी ने थामा हे तो वो  शख्सियत हे ” गांधी ”

क्या देश ,क्या विदेश ,राजनतिक मंच हो या आध्यात्मिक संघ , किसान हो या जवान ,,

पक्ष हो या विपक्ष -लेख हो या आलेख ,,

हिंदी से लेकर उर्दू ,,उर्दू से होकर इंग्लिश तक सभी भाषाओ में गांधी ऊकर आये हे !!

वो हाड़ मांस का धोती कुरता वाला इंसान जिसकी  प्रतिमा आज अंग्रेजो की संसद को सुशोभीत कर रही हे ,जिस अफ्रिका ने उस हिन्दुस्तानी  बेरिस्टर को ट्रेन से धक्का देकर ट्रेन से उतार दिया था ,आज उसी देश में जगह जगह गांधी मेमोरियल हे !!  कभी कभी सोचता हु एक शख्स की सीमाए तो होती ही हे ,,फिर गांधी असीमित केसे हुए जा रहे हे ?? केसे वो एक हिंदुस्तानी बेरिस्टर गुलाम भारत ,गंवार भारत से निकलकर विश्व के मानचित्र पर एक गहरी चमकदार लकीर बन गया !

विचार व्यक्तित्व बनाते हे सूना था ,

किसी व्यक्ति का विचार हो जाना ,

किसी व्यक्ति का एक “सोच” बन जाना वाकई अद्भुत हे ,अकल्पनीय हे !

वेसे आजादी के फ्लेशबेक में जाए तो ये विचित्र भी नही लगता क्युकी वो कोई सोच ही हो सकती थी जो बिना किसी ब्रांडिग के ,बिना किसी प्रचार के ,अपने पीछे भीड़ खड़ी कर सकता था —

धोती कुर्ते में ये आकर्षण ,ये जादू ,कभी पढ़ा नही, देखना तो खेर आज के युग में दूर की कोडी हे !

मेरी नजर में गांधी ,महात्मा नही थे बल्कि महात्मा जो होते हे उन्हें गांधी उपनाम दिया जाना चाहिए ,,

किसी की नकल ,किसी की शक्ल गांधी हो ही नही सकती क्युकी विचारो का कोई चित्र नही होता ,विचार असीमित होते हे ,,सोच को किसी सांचे में ढाला नही जा सकता ,

चरखा गांधी से जुड़कर अमर हुआ था ,बिन गांधी के चरखा केवल और केवल एक लोहे का यंत्र हे ,

गांधी वो पारस हे जिसके सम्पर्क में आते ही लोहा भी स्वर्ण बन जाता हे , बन गया हे ,,

कोई भी कलाकार या किसी भी कलाकार की कलाकारी अब दुसरा गांधी नही गढ़ सकती ,

फकीरों में फ़क़ीर , धोती कुर्ता वाला दिल जीत अमीर कब कोई बन पायेगा ??

गांधी सूरज का प्रकाश बन गया हे जिसकी तेजोमय से विश्व रोशन हे ,वक़्त की धुरी पर इसके तेज से भोर होती हो जेसे !

किसी अनजान मुल्क में गांधी भारत का झंडा लिए विद्यमान नजर आते हे ,

सम्पूर्ण विश्व को एक व्यक्ति ने अपने में समेट लिया हे !

गांधी अद्वितीय हे ,!

जेसे एक युग होता हे ,जेसे एक सूर्य होता हे ,

जेसे एक “में” होता हे वेसे ही गांधी एक हे ,,

गाँधी को समझने के लिए संत होना पड़ता हे ,संत के ह्रदय को भी गांधी बनाना पड़ता हे

ये गांधी हे मेरे शब्दों की सीमा हे ,इसलिए असीमितता को शब्द नही दे पा रहा हु —

गांधी ने वक़्त को थाम लिया हे , या वक़्त ने गांधी को अपना लिया हे ,, समय से अधिक बलवान गांधी हो गये हे ,,

तू बेह गया हे रग रग में ,

तू जम गया हे घट घट में ,

सीमाए जमीनों की बाँध ना पायी तुझको ए बापू,

तू बस गया हे पग पग में!!

गांधी सोच हो गयी हे दुनिया गांधीवादी कहलाने लगी हे ,वक़्त की धुरी गांधी पर आकर रुक गयी हे –वाह बापू तूने सही मायनो में वक़्त को जीत लिया हे

This article is written by Yash Lohar @yashindians

Comments