विविधता में एकता वाले इस देश में मुसलमानों के साथ किस तरह पेश आया जाए? मुसलमानों से मोहब्बत करें या नफरत? समाज में विद्वेष बढ़ाने वाला इतना घटिया सवाल आखिर पूछने की नौबत क्यों आ रही है? इस तरह के सवाल न उठे, उसके लिए समाज में माहौल तैयार करना किसकी जिम्मेदारी है? इस तरह के सवाल वह भी तब उठ रहे हैं, जब सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ निर्देश दिया है कि जाति-धर्म के नाम पर राजनीति करना अथवा वोट मांगना दंडनीय है। हम यहां कुछ मुद्दों की चर्चा करना चाहेंगे, जिसमें अल्पसंख्यकों पर हुई ज्यादती रोंगटे खड़े करने वाली है। वो भी कानून की परिधि में ज्यादती, जो कुछ ज्यादा ही खतरनाक है। करीब ढाई साल पहले पुणे (महाराष्ट्र) के मोहसिन शेख हत्याकांड में बॉम्बे  हाईकोर्ट ने गिरफ्तार 21 में से तीन आरोपियों को जमानत दे दी। 12 जनवरी को दिए गए आदेश में जस्टिस मृदुला भटकर ने अपने जजमेंट में स्पष्ट रूप से लिखा है कि मृतक मोहसिन शेख की एकमात्र गलती यह थी कि वह दूसरे धर्म से था। इसलिए यह बात आरोपियों के पक्ष में जाती है। ऐसा लगता है कि धर्म के नाम पर उन्हें उकसाया गया और उन्होंने हत्या कर दी। अब जस्टिस मृदुला भटकर के फैसले पर सवाल करने के बजाय यदि 19 जनवरी को पाकिस्तान द्वारा दिए गए इस बयान को किस रूप में लिया जाए, जिसमें हिंदू आतंकवादीसमूहों पर जम्मू क्षेत्र में कश्मीरी मुसलमानों का नस्ली सफाया करनेका न सिर्फ आरोप लगाया गया है बल्कि यह दावा भी किया गया है कि सरकार ऐसे समूहों को सशक्त बना रही है।इसमें मेरी व्यक्तिगत राय है कि यह सबकुछ सियासी खेल है। पर, यह सवाल भी करना चाहूंगा कि क्या इतना सियासी अंधा होना ठीक है कि मुस्लिमों से मोहब्बत को गुनाह मान लिया जाए।

सबसे पहले पाकिस्तान से आए बयान की चर्चा करते हैं। पाकिस्तानी विदेश विभाग ने एक बयान में 19 जनवरी को आरोप लगाया कि कश्मीरियों को सुरक्षा बलों द्वारा ‘फर्जी मुठभेड़ों’ में ‘मारा जा रहा है। यह आरोप पाकिस्तान विदेश विभाग के प्रवक्ता नफीस जकरिया ने लगाया। उन्होंने कहा कि हम कश्मीरियों की निरंतर की जा रही हत्या की निंदा करते हैं। उन्होंने दावा किया कि हिंदू आतंकी संगठन और हथियारबंद ग्रामीण रक्षा समितियां जम्मू क्षेत्र में कश्मीरी मुसलमानों का नस्ली सफाया कर रही हैं। जकरिया ने आरोप लगाया कि साल 2014 में मोदी सरकार के सत्तासीन होने के बाद से हिंदू आतंकवादियों को सरकारी मशीनरी की पूरी मदद से सशक्त बनाया गया है। जकरिया ने कहा कि पाकिस्तान कश्मीरियों के ‘मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन’ को लेकर विश्व समुदाय को लगातार सजग कर रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक से इतर कई नेताओं से मिले हैं और उस दौरान उन्होंने भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा कश्मीरियों के ‘मानवाधिकारों का उल्लंघन किये जाने’ का मुद्दा भी उठाया। अब चर्चा पूणे के मोहसिन हत्याकांड की। मोहसिन पुणे की एक कंपनी में काम करता था। दो जून 2014 की रात को नमाज के बाद घर जा रहा था। उस समय उस पर हमला हुआ। उसका दोस्त रियाज अहमद मुबारक भी साथ था। आरोप है कि हिंदू राष्ट्र सेना के सदस्यों ने छत्रपति शिवाजी और बाल ठाकरे की आपत्तिजनक तस्वीर पोस्ट किए जाने का आरोप लगाकर उन पर हमला किया। हडपसर थाने में हत्या का मामला दर्ज हुआ और हिंदू राष्ट्रय सेना के नेता धनंजय जयराम देसाई उर्फ भाई सहित 21 लोगों को गिरफ्तार किए गए। इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने गिरफ्तार 21 में से तीन आरोपियों को जमानत दे दी। 12 जनवरी को दिए गए आदेश में जस्टिस मृदुला भटकर ने कहा है कि मृतक की एकमात्र गलती यह थी कि वह दूसरे धर्म से था। खैर, मोहसिन का परिवार जमानत आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। अब सुप्रीम कोर्ट पर निर्भर करता है कि वह बॉम्बें हाईकोर्ट के फैसले पर अपनी मुहर लगाता है अथवा रद्द करता है।

उक्त दोनों मसले बेहद गंभीर हैं। दोनों मुद्दों का गंभीरता से अध्ययन के उपरांत इस मुकाम तक पहुंचा जा रहा है कि शायद देश में रह रहे मुसलमानों से नफरत करने की एक फिजां तैयार की जा रही है। वह फिजां कौन तैयार कर रहा है, क्यों तैयार कर रहा है, इस सवाल का जवाब डर के मारे भले कोई न दे, पर एहसास तो अमूमन सबको है कि आखिर इस विद्वेष की जड़ कहां हैं। दूसरे शब्दों में यह भी दबी जुबान से कह सकते हैं कि यदि इसी तरह सबकुछ चलता रहा तो बहुत जल्द इस देश में मुसलमानों से मोहब्बत करने वालों को अघोषित रूप से राष्ट्रद्रोही करार दिया जाने लगेगा। जिस तरह समाज और दुनिया का एक वर्ग अवैध तरीके से हर मुसलमान को ‘आतंकी’ मानता है, ठीक उसी तरह मुसलमान से मोहब्बत करना भी राष्ट्रद्रोह कहलाने लगेगा। जो हालात बन रहे हैं, उसे देख यह भी आशंका जताई जा सकती है कि मुसलमानों से मोहब्बत करने वालों को राष्ट्रद्रोही मानते हुए उसके खिलाफ किसी भी धारा में मुकदमा भी चलाया जा सकता है। हालांकि अभी घोषित तौर पर एसा हुआ नहीं है, पर अघोषित रूप से इस तरह मामलों की गणना संभव नहीं। एक खास पार्टी की सरकार वाली राज्यों में एसे कई उदाहरण देखे गए हैं कि वहां मुसलमानों से दोस्ती रखने वाले हिन्दू अथवा अन्य सम्प्रदाय के लोगों के खिलाफ अवैध तरीके फर्जी मुकदमे लादकर यह बताने की कोशिश की गई है कि मुसलमानों से यारी ‘गुनाह’ है। आप खुद सोचिए ढाई साल पूर्व हुए पूणे (महाराष्ट्र) वाले कांड में मुसलमान युवक की हत्या हुई। न्यायमूर्ति ने यह कहते हुए कुछ आरोपियों को बेल दे दिया कि मृतक दूसरे सम्प्रदाय का था, इसलिए उसकी हत्या को बड़ा गुनाह नहीं माना जा सकता। जैसा कि पाकिस्तान का आरोप है कि कश्मीर में मुसलमानों पर संगठित गिरोह हमले कर रहे हैं। सरकारी सैनिक भी कथित रूप से मुसलमानों के खिलाफ अभियान चलाकर उनका उत्पीड़न कर रहे हैं। निर्दोष मुस्लिमों के घरों में दबिश देकर अनायास ही उन्हें परेशान किया जा रहा है। यदि इन दोनों मसलों को ठीक से समझें तो आपको अघोषित रूप से यही संदेश दिया जा रहा है कि मुसलमानों से मोहब्बत करना गुनाह है।

विविधता में एकता वाले इस देश को सोने की चिड़िया इसलिए भी कहा जाता है कि यहां हर जाति-धर्म-वर्ग-समुदाय के लोग एक साथ उठते-बैठते हैं। साथ-साथ सुख-दुख बांटते हैं। यहां का मुसलमान होली-दिवाली मनाता है तो हिन्दू ईद-बकरीद में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है। हिन्दू के घर में शादियां होती हैं मुसलमान के घर से टैंट और शामियाना आता है। वहीं जब किसी मुस्लिम के खतना होता है तो हिन्दू हलवाई खाना बनाता है। फिर से वही सवाल कि क्या इसी तरह आबोहवा बदलती रहेगी तो वह अमन, चैन और मोहब्बत वाली बात का क्या होगा। क्या देश में सियासत सिर्फ सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने के लिए ही है, उसे सुधारने-संवारने के लिए नहीं? मैं विधि विशेषज्ञ और एनएएलएसएआर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ (हैदराबाद) के वीसी (प्रो.) फैजान मुस्तफा साहब को सैल्यूट करना चाहूंगा कि उन्होंने पूणे कांड पर लिखे अंग्रेजी अखबार के लिए एक आलेख में पूरी तरह साफगोई से सारे जटिल सवालों का जवाब बिल्कुल सहज तरीके से दिया है। यह जिम्मेदारी सिर्फ वीसी (प्रो.) फैजान मुस्तफा साहब की ही नहीं है, यह जिम्मेदारी देश के हर उस वर्ग की है जो आंतरिक अमन-चैन को बढ़ावा देना चाहता है। पेंडूलम की तरह डोलती सेक्युलरिज्म की नींव को मजबूत करना चाहता है। वैसे लोगों को आगे आना चाहिए। लिखना चाहिए। समाज को एकजुट रखने के लिए जरूरत पड़ने पर संघर्ष भी करना चाहिए। क्योंकि आज के माहौल को देखकर यह लग रहा है समाज को तोड़ने वाली शक्तियां कुछ ज्यादा ही ताकतवर हो गई हैं। चूंकि मुझे भी डर लग रहा है इस बदलते माहौल के लिए बगैर किसी को जिम्मेदार ठहराए मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपील करना चाहूंगा कि वे खुद देश में सौहार्द कायम रखने के लिए लोगों से अपील करें, जरूरत पड़े तो कानून बनाएं यदि उससे भी काम नहीं चलता तो अपने समर्थकों को जन-जनतक भेजकर संदेश दिलवाएं कि आपस में लड़ो मत। प्यार करो। मुसलमानों से मोहब्बत करना कोई गुनाह नहीं है? समाज में बेहतर संदेश देने का यह मौका भी अच्छा है कि देश के सबसे राज्य यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। यह विडम्बना ही है कि नेता मुसलमानों का वोट तो चाहते हैं, पर उनसे मोहब्बत करने से परहेज करते हैं।

संपर्कः राजीव रंजन तिवारी, द्वारा- श्री आरपी मिश्र, सहयोग विहार, धरमपुर, गोरखपुर (उत्तर प्रदेश), पिन- 273006. फोन- 08922002003.

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