यूपी चुनावों में मिली प्रचण्ड जीत के बाद योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाना हिंदुत्ववादी चेहरे को उभार देने का प्रयास था। यूपी चुनाव के परिणाम के बाद से देश के अलग अलग हिस्सों में प्रयोजित भीड़ द्वारा हिंसा में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। गौमांस के नाम पर धड़ाधड़ अल्पसंख्यकों और दलितों की पिटाई शुरू हुई, जिनमे से कुछ की पिटाई तो हत्या होने तक की गई।
आखिर यह सब क्या था। यह बीजेपी और संघ की वह कार्यप्रणाली है जिसे उसने आजतक शालीनता की केंचुली में ढंके रखा था, अपने ख्वाब को पूरा करने के लिए। हिंदुस्तान की सत्ता पर काबिज होने का ख्वाब।
आज देश के युवाओं के लिए बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है। नई नौकरियों के सृजन के उलट पुरानी नौकरियां समाप्त की जा रही हैं। विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को एक व्यक्ति की सनक ने न सिर्फ धीरे किया बल्कि बेपटरी कर दिया। नोटबंदी लागू करने का देश के सामने अभी तक कोई सकारात्मक उद्देश्य साबित नही हुआ है, परन्तु इस तुगलकी फरमान ने करोड़ों परिवारों के जीवन मे अवसाद घोल दिया है।
यही अवसाद देश मे नकारात्मकता को बढ़ावा दे रहा है। आज गुजरात मे राहुल गांधी जी पर हुआ हमला भीड़ द्वारा प्रायोजित हमलों का बड़ा रूप है। यह मुठ्ठीभर लोगों की भीड़ निडर है, क्योंकि इसे सत्ता का शह प्राप्त है। यह भीड़ एक विचारधारा की प्रतीकात्मक उदाहरण है। संघी विचारधारा का प्रतीक जो अपने खिलाफ किसी को बर्दाश्त नही कर सकता, जिसे प्रजातंत्र में तनिक भी भरोसा नही है। और दूसरी बात जो इस हमले के पीछे है वह है देश मे स्थापित होता अवसाद और नकारात्मकता का माहौल। शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी, ग्रामीण तबके के किसानों की अनदेखी और सीमा पर रोज शहीद होते जवानों ने देश मे निराशा का माहौल बना दिया है।
लेकिन मोदी जी और उनकी सरकार दिल्ली में चैन की बांसुरी बजा रही है। मोदी जी जानते हैं कि बेरोजगारी के मुद्दे पर हम और आप उतने उग्र नही होंगे जितना धार्मिक मुद्दे पर होंगे। वो जानते हैं कि उन्हें शमशान और कब्रिस्तान के भाषण न सिर्फ वोट दिलाने में मदद करेंगे बल्कि जनमानस की रगों में दौड़ते लहू को उग्र बना देंगे जो सामरिक विषयों पर उनकी सरकार की विफलताओं को मन के किसी कोने में पीछे धकेल देगी।
भारतीयता एक परम्परा जिसे हमारे पूर्वज पिछले सात दशकों से जीते आ रहे हैं, आज यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम सब एक साथ खड़े होकर सही को सही और गलत को गलत बोलने का साहस दिखा सकें, क्योंकि सत्य परेशान हो सकता है पराजित नही।
सत्यमेव जयते।
जय हिंद

Article is authored by Tathagat Harsh Vardhan, Practicing Lawyer and Congress Leader

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