दुनिया में ऐसा कोई इंसान न हुआ जो आलोचना से परे हो,जिसके 10 विरोधी न हो,जिसे 4 लोग गरियाते न हों और ये नियम साधारण से लेकर असाधारण महामानवों और संत साधु ऋषि पैगम्बर तुल्य इंसानों सब पे लागु है।यहाँ तक कि, ईश्वर अल्लाह तक भी हमेशा खोपचे में ले लिये जाते रहे हैं।लोग चाय दूकान पर मठरी खाते हुए भी सामने वाले से भगवान के होने का सबूत मांगते हैं।

भगवान तो फिर भी छोटा मैटर है, लोग तो मोदी जी,केजरीवाल जी और राहुल जी और लालू जी,मुलायम जी जैसे संपूर्ण महामानव में भी खोट खोज लेते हैं और आलोचना करते रहते हैं।
ऐसे में अक्सर जब आज की पीढ़ी के नवलौंडों को आंख मूंद गांधी-नेहरू-पटेल या आज़ाद को गरियाते सुनता हूँ तो बहुत आश्चर्य नहीं होता।
मुझे ये बात समझ में खूब आती है कि, हैरी पॉटर के सारे वॉल्यूम से लेकर चेतन भगत के हाफ गर्लफ्रेंड तक सारी ज्ञानमयी पुस्तकों का गहन अध्ययन कर लेने वाली पीढ़ी ने नंदन और चम्पक जैसी इतिहास की भी वांगमयी रचनाओं को गहराई से पढ़ समझ ही “गांधी-नेहरू” इत्यादि जैसे नेताओं के बारे में अपनी राय बनायीं होगी।
साथ ही फेसबुक पर वेद और कुरआन से ज्यादा प्रामाणिक भटकते न्यूज़ पोर्टल के लेख ने भी इस पीढ़ी की इतिहास संबंधी जानकारी और उसकी समझ को और पुख्ता किया है, योग्य बनाया है।
इन्ही सब का तो फल है कि, आज 30 जनवरी को जिसे दुनिया “महात्मा गांधी नाम के राजनेता”के पुण्यतिथि के रूप में जानती है,कुछ लोग इसे नाथू गोडसे नाम के उस व्यक्ति के वंदन दिवस के रूप में मनाते दिख रहे हैं जिसने गांधी जी नाम के 80 वर्ष के बुजुर्ग की हत्या कर दी थी।
अब आईये जरा कुछ साफ़ साफ़ कह दूँ,
ऐ समझदारों और राष्ट्रभावना से ओतप्रोत,भारत माता के द्वारा गोद लिए संतानों,भारत को माता कहने के हक़ या भावना पर बस आपका ही पेटेंट नहीं है,ये हमारे जैसे पूत कपूत के भी हक़ में है।
ये हम जैसे कपूतों के भी हक़ में है,जिसे लगता है कि,गांधी हाँ हमारे राष्ट्रपिता हैं और गोडसे उनका हत्यारा।
गांधी जी से आपकी लाख असहमति हो पर आप इस बात को कैसे मिटा दे सकते हैं कि,भारत माँ के पास आज तक दुनिया को प्रभावित करने वाला” गांधी से”बड़ा कोई दूसरा बेटा,नेता नहीं।पूरी दुनिया में भारत की ओर से गांधी से ज्यादा स्वीकार्य और श्रध्येय नेता कोई न हुआ।
अपनी सारी असहमति के बाद भी इतना तो भान रखिये कि, भारतीय राजनीति इतिहास को दुनिया में केवल इसलिए दिलचस्पी से पढ़ा और समझा जाता है क्योंकि उसके पास”गांधी हैं”।
ठीक है,आप गांधी के योगदान और योग्यता को कम कर आंकिये, उसकी आलोचना भी करिये पर भारत के एक मात्र वैश्विक चरित्र वाले इस महान नेता के पुण्यतिथि पर उनके हत्यारे का वंदन कर एक व्यक्ति के रूप में संवेदनहीनता का और एक राजनितिक समझ के व्यक्ति के रूप में बकलोली का तो परिचय मत दीजिए।
गांधी जो भी थे,किसी pr कंपनी के प्रचार प्रसार से थोड़े पाये थे पूरी दुनिया में ये स्थान,वो जो भी थे अपने उन्ही अच्छे बुरे कर्मों के साथ ही थे।अगर गांधी वाकई इतने खारिज़ और अवांछित हैं तो हिदुस्तान के किसी भी विचारधारा के दल में ये कुबत है क्या कि वो गांधी को खारिज़ कर दे।
गांधी इस देश,समाज,घर में इतने गहरे घुसे हैं कि, फेसबुक से निकल अपने गांव वाले घर जाईये और वहां गांधी को गरिया के आजमाइए,हो सकता है पिता जी माफ़ कर दें,चाचा बख्श दें पर तबतक में दादा मार के थोथना फुला देंगे।
गांधी जी की टोपी थामे एक आदमी तो इस देश के हर घर में है मर्दे।
क्यों कोई दल,दलाल,देवता कोई भी बिना गांधी एक कदम भी चलने में हांफ जाता है।
क्यों इस देश में हर भले बुरे सब के लिए आज भी”मज़बूरी का नाम महात्मा गांधी है”।
गांधी अपने होने और अनिवार्य होने का इससे बड़ा सबूत और क्या देंगे।
महराज आप किस बोध से इतिहास और वर्तमान पढ़ समझ रहे हैं कि आपको गांधी इतने बुरे, इतने बुरे, इतने बुरे लगते हैं कि,किसी व्यक्ति के मरने वाले दिन आप उसके हत्यारे को नमन कर रहे हैं?
ये गांधी से असहमति का मामला तो नहीं लगता है डार्लिंग, ये तुम्हारे अंदर की घृणा है, इसे किसने डाला,क्यों डाला और तुमने क्यों इसे अपने अंदर पनपने दिया, उस जहर को खोजो और उसका इलाज करो।
ये जहर अभी तो देश के पिता कहाने वाले पर उगले हो न,कल तुम्हारे अपने पिता भी इसके शिकार हो सकते हैं, सावधान रहना।
असहमति ठीक है,उसका समाधान है पर घृणा किसी की नहीं,उसका न कोई दल होता है न कोई विचारधारा।
तुम्हारा बस इस्तेमाल किया जायेगा,और इस इस्तेमाल होने की प्रक्रिया में कब आप बापू से बाप तक के हत्यारे को पूजने लगेंगे, पता भी न चलेगा।
मैं “गोडसे” को गंभीरता से नहीं ले रहा क्योंकि कमजोर मन वाले,इस्तेमाल होने वाले और सनकी इंसान हर युग में थे,गोडसे ने अगर कोई दुर्घटना कर भी दी तो उसे कानून की सज़ा मिली।
हम आज भी “ओम बबवा”जैसे सनकी पागल से किसी भी हत्या करवा दें,क्या कर पाइयेगा ऐसे का।
वो रोज़ tv पे भारत माता की गोद में बैठ मूत फेंक रहा है,पत्रकार पे पानी फेंक देता है,राष्ट्रवाद का नारा दे,वंदेमातरम बोल हत्या करने की बात स्वीकारता है और मजेदार बात है कि गोडसे को अपना आदर्श मानता है।
बताइये आपमें से कितने लोग ओम बबवा को अपना हीरो या आदर्श मानेंगे?
गोडसे को पूजने की परंपरा में आपको ओम बाबा जैसा सपूत पैदा होते मिल रहा है, क्या आपके हमारे चेतने के लिए इतना काफी नहीं?
वंदेमातरम की कोई परंपरा किसी भी राजनितिक असहमति के लिए हत्या को जायज नहीं ठहरा सकती।
सो,आप गांधी के साथ रहिये या दूर पर आदमी बने रहने की शर्त तो मत तोड़िये।
ये पोस्ट इसलिए भी लिखना जरुरी था क्योंकि,हम खुद को इतना भी कमजोर न कर दें कि,जब राष्ट्रपिता कहाने वाले के हत्यारे के वंदन के विरोध में भी न बोलने का साहस जुटा पाएंगे तो कल खाक किसी विचारधारा या सरोकार के लिए खड़ा हो पाईयेगा।
जान पर पहरा लग सकता है पर सोंचने और बोलने के हौंसले पर थोड़े किसी का चलेगा।मेरे समझ के हिस्से से,भारतीय राजनीति के विराट देवता”गांधी” आपको नमन।।जय हो।
[1/30, 10:05 PM] Pankaj Tiwari Singoli: एक कांग्रेस कार्यकर्ता होंने के नाते,,,मुझे बापू को सच्ची श्रधांजलि देने का कोई नेतिक हक नही हे,,,,,।

क्योकि ये मेरी कमजोरी हे मेरा दोष हे की मेरी वजह से ही देश आज गांधी की कातिल विचारधारा के हाथ में गया हे,,,।

और एक कांग्रेस होने के नाते में इसका दोषी हु,,,,,,और में शर्मिंदा हु,,,,,की मेरे राजनीतिक स्वार्थ की वजह से ही मेने निरन्तर गांधी की विचारधारा वाली सोच कांग्रेस को नुक्सान पहुचाया हे,,,,,

हम कांग्रेस का नुक्सान कर गांधी विचारधरा की कातिल सोच को एक तरह से अपरतक्ष समर्थन ही कर रहे थे ,।

अगर हम निष्क्रिय भी रहे ।,,और कांग्रेस का नुक्सान घर बैठकर तमाशबिन की तरह देखते भी रहे तो,,भी ये एक तरह से गांधी हत्यारी विचारधारा को समर्थन समान ही था,,,या फिर हम गोडसे वादी कातिल विचारधारा को अपने राजनीतक स्वार्थ पद की खातिर,,,गांधीवाद को कमजोर कर रहे थे,,,।

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कैसे करू राष्ट्र पिता को सच्ची श्रधांजलि अर्पित करने का साहस,,।
देश आज बापू की हत्यारी और बापू की सोच स्तय अहिंसा की जगह जूठ और हिंसा वाली विचारधारा और मानसिकता वालो के हाथ में हे,,,

महात्मा गांधी ,अर्थात भारत और विश्व की आत्मा,अर्थात विश्वात्मा,,,।और हम सबके भारत के परामात्मा,,,

में एक सच्चा देशभक्त और राष्ट्रवादी हु,।,,गांधी विचारधारा का समर्थक हु,,,।
और गांधी वादी विचारक मीनाक्षी जी नटराजन पूर्व सांसद के विचारो का समर्थक हु,,।

और मुझे दर्द और दुःख हे ।अफ़सोस हे,।

और में शर्मिंदा भी हु ,,,।

की कैसे आज के मोजुदा दौर में,,,आपको सच्ची श्रधांजलि अर्पित करू,,,,,

जिस देश को आपने अहिंसा के दम पर आज़ाद कराया,,,,,।मानवता ,इंसानियत को ही सबसे बड़ा धर्म बताया,,,

आज वही देश आपकी हत्यारी विचारधारा के हाथ में,,,,,,और हम देशवासी गांधी राष्ट्रवाद की जगह आपके हत्यारे वाले गोडसे राष्ट्रवाद में बह गए,,,।

और हमने देश गांधी की कातिल और गांधी का अपमान करने वाली विचारधारा के हाथो में सोप दिया ,,।
चन्द प्रोलोभनो और स्वार्थ की खातिर ,,हमने राष्ट्र को आपकी हत्यारी ,इंसानियत ,मानवता विरोधी ,भाई चारे एकता की दुश्मन विचारधारा को समर्थन दे दिया ,, गोडसेवादियो पर भरोसा कर लिया,,।

परम पूज्यनीय वन्दनीय महात्मा गांधी जी,,

हम शर्मिंदा हे,,,,,

और कैसे मोजुदा दोर में बापू को जूठी और राजनितिक श्रधांजलि देने का नकली ढोंग करू,,पाखण्ड करू,,,,।

नही हे हम में जूठी और बनावटी श्रद्धांजलि देने की हिम्मत ,,न हम में साहस हे,,,

में एक सच्चा कांग्रेसी और राष्ट्रवादी असली देशभक्त होने के नाते ,,,

आज के दिन। और मौजदा दोर में ,,,

बापू को सच्ची श्रधांजलि देने में असमर्थ हु,,,

क्योकि जब गांधी की हत्यारी विचार धारा गांधी के देश पर पदासीन हो तो,,,,

में कैसे बापू को सच्ची श्रधांजलि प्रदान करू,,

और कोई नेतिक अधिकार नही मुझे,,,,,,हक नही हे,,,

क्योकि इसके लिए में खुद भी जिम्मेदार हु,,

स्वार्थ ,पद ,सत्ता पाने,,की राजनीतिक स्वार्थ के चलते,,ही ,हमने ही आपकी विचारधारा को कमजोर किया हे,,,

पूज्य बापू हक तो नही मुजे श्रदांजलि देने का,,,,

किन्तु मेरे विचार ही परम् पूज्य बापू महात्मा गांधी जी को सच्ची श्रधांजलि हे,,,,,,

हो सके तो हमारी वैचारिक सच्ची श्रधांजलि स्वीकारीयेगा ,,,

आपका अपना,,।
,आदरणीय,,,,मीनाक्षी जी नटराजन पूर्व सांसद के विचारो का समर्थक ,,,,,

पंकज तिवारी,।
एक ,निष्क्रिय कांग्रेस कार्यकर्ता,,,,

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