प्रिय पाठक ,

पिछले कुछ दिनों से “सामूहिक चेतना ” नामक शब्द मीडिया में काफी उपयोग में लाया जा रहा है । तो सोचा की आज बात की जाएगी भारतीय सामूहिक चेतना के बारे जो भगवा रंग में डूब चुकी है या इस भारतीय सामूहिक चेतना को भी “मोदीयाबिंद” या “संघाईटीस” हो चुका है और आश्चर्य की बात ये है कि कुछ लोग इसे राष्ट्रवाद और हिंदुत्व का नाम देते हैं । दक्षिणपंथी गैंग के लोग सबसे ज़्यादा माहिर है आपकी “सामूहिक चेतना ” जगाने और बुझाने में और आपको पता भी नही चलेगा की आपकी सामूहिक चेतना इन दाक्षिणपंथियों के शासन में कितनी “चयनात्मक” और “दोगली” हो चुकी है ।बिलकिस बानो और निर्भया केस में जिस तरीके से हमारी सामूहिक चेतना को जलाया और बुझाया गया वो हमारे चयनात्मक और दोगली सामूहिक चेतना का सबसे बड़ा उदहारण है ।
ज़रा सोचिए की हमारे देश मे एक महिला के साथ आठ लोग उसके पति के सामने बलात्कार कर देते है और हमारी सामूहिक चेतना आहत ही नही होती ।क्या हमारी सामूहिक चेतना , जाती धर्म या किस राज्य में किस राजनैतिक दल का शासन है ये सारे तथ्यों को मद्देनजर रखने के बाद ही आहत होती है ? क्या हमारी सामूहिक चेतना इसलिए आहत नही हो रही कि अब यूपी में “यादव युग” की जगह “क्षत्रिय योगी” युग आ चुका है और सिर्फ दो ही महीने हुए हैं इस क्षत्रिय युग को आये हुए इसलिए जब तक पुराने युग के सामाजिक कुप्रभाव खत्म नही हो जाते (जिसकी कोई समय सीमा निर्धारित नही है) तब तक चुप रहे या फिर “तब कहाँ थे” वाला जुमला ठोक कर प्रश्न पूछने वाले को परास्त कर,उसे देश द्रोही घोषित कर सामूहिक चेतना के साथ ही बलात्कार कर दे ।
आपकी “सामूहिक चेतना” जातिगत और धार्मिक पृष्टभूमि के आधार पर ही भड़कती है और साथ ही साथ आपकी सामूहिक चेतना इस विषय का भी ध्यान रखती है की सत्ता में किस दल की सरकार है , अगर राष्ट्रवादी सरकार की है तो आपकी सामूहिक चेतना स्वयं का ही गला घोट देगी या फिर “जातिगत” आधार पर भड़केगी जैसे हरियाणा में भड़की थी औऱ उत्तरप्रदेश में “जातीगत” आधार पर अभी सुलग रही है ।

ज़रा सोचिये आपकी सामूहिक चेतना “कश्मीर” में हुए बलात्कारों पर कैसे भड़कती है और “उत्तरपूर्वी” राज्यों में हुए बलात्कारों को कैसे नज़रअंदाज़ करती है । ज़रा सोचिए आपकी सामूहिक चेतना देश मे दलित महिलाओं के साथ हुए तमाम बलात्कारों की घटनाओं को किस तरीके के से कुचल देती है अब चाहे वो फूलन देवी हो,चाहे वो भंवरी देवी हो और चाहे छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों द्वारा आदिवासी महिलाओं के साथ हुए बलात्कार हो। आपकी सामूहिक चेतना इन सभी मामलों में बलात्कारियों के समर्थन में मौनव्रत धारण करके खड़ी होती है।

क्या बिलकिस बनो के संधर्भ में भी आपकी सामूहिक चेतना “गोधरा” कांड की आड़ लेकर ,इस सामूहिक बलात्कार को जायज़ ठहराती है , मतलब आपकी दक्षिणपंथी सामूहिक चेतना “धर्म” के आधार पर बलात्कारियों की चेतना भी बन जाती है ।कारगिल से लेकर गोधरा और हरियाणा से लेकर कश्मीर तक “खुफिया तंत्र” द्वारा उपलब्ध कराई गई खुफिया सूचनाओं को ये दक्षिणपंथी साम्राज्य अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए “नज़रअंदाज़” करता रहता है और हमारी सामूहिक चेतना भी इस “नज़रअंदाज़ कर देने वाले कृत्य” पर भी कोई सवाल नही खड़ा कर पाती है । एक दक्षिणपंथी और फासीवादी साम्राज्य किसी भी “समाजिक -राजनैतिक घटनाक्रम” का “नैतिक मापदंड और एजेंडा’ स्वयं निर्धारित करता है और स्वयं को उस “समाजिक -राजनैतिक घटनाक्रम” के केंद्र बिंदु में रख कर अपनी राजनैतिक विचारधारा के लिए एक “प्रचुरोद्भवन वातावरण” का निर्माण मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से करवाता है।
ज़रा सोचिए आपकी तथाकथित “सामूहिक चेतना” पदमावती के काल्पनिक दृश्य ” पर तो भड़क जाती है परंतु दूसरी तरफ “फूलन देवी” के हत्यारे को “हिन्दू हृदय” सम्राट भी घोषित कर देती है आपकी तथकथित सामूहिक चेतना , किस तरह बिहार में रणवीर सेना की “सामूहिक चेतना” को गौरवान्वित रूप ले लेती है जो जातिगत मानवधिकार हनन की सबसे बड़ी घटना मे से एक है । घोड़े पर दलित बैठता है, हाथी पर दलित बैठता है , फूल से सजी गाड़ी में दलित बैठता है तो नजाने उनका सामाजिक तौर पर बहिष्कार करने की “सामूहिक चेतना” कहाँ से जाग उठती है । ऐसी सामूहिक चेतना सिर्फ जाती और धर्म देखकर ही भड़कती है और वो भी “राष्ट्रवाद” का चोगा पहनकर।

खैर जम्मू के किसी पुलिस थाने में किसी महिला के साथ पुलिस वालों ने वो ही हरकत की है जो निर्भया केस में उस नाबालिक ने की थी ।देखते है सामूहिक चेतना कितनी भड़कती है क्योंकि कहा ये भी जा रहा है कि इस केस को को रफा दफा करने के लिए राज्य सरकार का एक वर्ग काफी दबाव बना रहा है ।
बड़ा ताज़्ज़ुब होता है कि राष्ट्रवादियों की सामूहिक चेतना अचानक से गायब हो जाती है जब कोई “भक्त” प्रधानमंत्री की विचारधारा की आड़ में बलात्कार की धमकी देता है और ट्रोल करता है , बड़ा ताज़्ज़ुब होता है कि हमारी सामूहिक चेतना उस समय भस्म हो जाती है जब प्रधानमंत्री के नाम से चल रहे राष्ट्रवादी संघटनो के मुखिया उत्तरपूर्व राज्य की महिलाओं से साथ संदिग्ध अवस्था मे पकड़े जाते है और बड़ा ताज़्ज़ुब होता है जब मुरथल हाईवे पर बड़े सामूहिक स्तर पर महिलाओं के साथ ब्लात्कार होते हैं और मीडिया के और समाज की सामूहिक चेतना कुछ दिनों बाद गायब दिखती है । कोई “इस्लामिक” एंगल नही है तो हो सकता है मुरथल सामूहिक रेप कांड में हमारी दक्षिणपंथी सामूहिक चेतना खड़ी नही हो पा रही हो । परन्तु ये मीडिया आधारित दक्षिणपंथी सामूहिक चेतना बैंगलोर में हुई सामूहिक छेड़छाड़ की घटनाओं पर बहुत उफान मारती है जो सीसीटीवी कैमरे की फुटेज के आधार पर झूठ और गलत साबित होती है ,काश बैंगलोर में राष्ट्रवादी सरकार होती तो तथ्यहीन खबरों को चलाने की ज़रूरत नही पड़ती ।क्या बैंगलोर वाली घटना क्या वास्तव में एक “बड़ी सामूहिक छेड़छाड़” की घटना थी । शायद नही क्यूंकि सोशल मीडिया में गुडगाँव में किसी “ऍम जी रोड ” पर कुछ साल पहले हुई छेड़छाड़ की घटना के एक विडियो को बैंगलोर के किसी “ऍम जी रोड” की छेड़छाड़ की घटना के तौर पर सोशल मीडिया में दिखाया गया . सबूत
के लिए लिंक पेश है जिसमे दो अलग घटनाओ को जोड़कर एक घटना के तौर पर दिखाया गया है –

बरहाल दक्षिणपंथियों का अगला चुनावी पैंतरा “निर्भया” केस में उस नाबालिग के नाम और धर्म पर टिका है, ताकि ऐसे मुद्दों की आड़ में आने वाले राज्यों के चुनावों में सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से साम्प्रदायिकता परोसी जा सके।परन्तु जो घिनोनी हरकत इस “निर्भया” के तथाकथित “नाबालिक” बलात्कारी ने की है जिसके “धर्म” के आधार पर हमारी सामूहिक चेतना फिर से खड़ी होगी ,ऐसी घिनोनी हरकत कुछ दिन पहले जम्मू पुलिस के अधिकारी ने किसी महिला के साथ थाने में भी की है ।। अब धर्म नही पूछोगे ।। अब जाती नही पूछोगे ।।

मणिपुर में एफस्पा का दुरुपयोग करने वाले सैनिकों का धर्म नही पूछोगे , जिन्होंने महिला के जननांग में बंदूक की गोलियाँ ठूस दी थी ,सामूहिक बलात्कार करने के बाद । पूछिये जाती और धर्म । शर्मा क्यों रहे है । आपकी दक्षिणपंथी सामूहिक चेतना का खोखलापन कहीं उफ़न कर बिखर ना जाये ।याद रखियेगा की मणिपुर से लेकर छत्तीसगढ़ तक और छत्तीसगढ़ से लेकर गुजरात तक और गुजरात से लेकर कश्मीर तक ऐसी कई सामूहिक दुष्कर्म और बलात्कार की घटनाएं है जिनके अपराधियों और आरोपियों के जाती और धर्म सुनकर आपकी दक्षिणपंथी सामूहिक चेतना लगभग चरमरा सी जाएगी।
आशा करता हूँ इस लेख को पढ़ने के बाद आपकी सामूहिक चेतना जो 16 मई सन 2014 के बाद अर्नब गोस्वामी की तरह , रोहित सरदाना की तरह या फिर तिहाड़िया सुधीर की तरह बरताव नही करेगी और वो सामूहिक चेतना अब “दक्षिणपंथी” कुप्रभाव से बाहर ज़रूर आएगी ।
आपका प्यारा – देशद्रोही
चित्रेश गहलोत

first published at – https://chaitanya-ganrajya.blogspot.in/2017/05/blog-post.html

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