कल सोशल मीडिया पर तेज़स्वी यादव के एक रिट्वीट पर अचानक से नज़र गयी जो एक ब्लॉग था ,रविश का जिसमे उन्होंने प्रधानंत्री को उद्वोधित कर लिखा था जिसका शीर्षक कुछ यूँ था ।

“एक बी एम्  डब्लू गाडी से दलित नहीं कुचले जाते ” वो ब्लॉग बहु अर्थी होने के साथ साथ  बेहद संवेदन शील और संवेदनाओं को झकझोरने वाला था । पढने के बाद में कुछ देर के लिए शून्य समाधिस्त हो गया ,बहु अर्थी और बहुसंवेदनाओ का ज्वार भाटा बहुत देर तक झकझोरता रहा । एकाएक कुछ सोच कर मुस्कुरा भी दिया ,ये सोच कर की जैसा उस लेख को पढ कर मुझे लगा क्या प्रधानमंत्री भी समझ पाए होंगे ?

उसका जबाब नदारद था । उसके लिए संवेदनाओं भरा ह्रदय ज़रूरी जो बहुत से नेताओं के पास शायद ही हो ? और समझने का माद्दा भी ।

यदि इतना समझ में आ जाता तो शायद पी ,एम् साब ने अपने कुछ नेताओं के ऊपर सर्जिकल स्ट्राइक कर दिया होता ,उनके अमानवीय आचरण के लिए ?

सोशल मीडिया पर NDTV के समर्थन में हेश टेग ट्रेंड हो रहा था , एक कलम ,एक विचार ,सत्ता के सामने सत्य के साथ ,देशवासियों की शक्ती के साथ ,एक विचार ने शक्तिशाली दिल्ली की सत्ता का सिंहासन हिला दिया ,ये विचार ही तो हैं जिसने नफरत को हरा दिया ।

शाम होते होते पता चला आज शनिवार को रविश का प्राइम टाइम हैं ,बेकरारी से इंतज़ार था ,आज शाम को अपना कोई भी लेख लिखने का मन नहीं था ,क्युकी अब सवालों के ज़बाब नहीं ,…

बदले में धमकिया  मिलती हैं ।

रविश जी का ये हुनर ही हैं की अपनी बात को ,संवेदनाओं को अपने दर्शको तक पहुचाने में वो माहिर हैं ,लेकिन कल का दिन कुछ अलग था ,लग रहा था की अंग्रेजो की हकुमत में कोई क्रांतिकारी नेता अपने समर्थको को कोई गुप्त सन्देश दे रहा हो ।

प्राइम टाइम की शुरुआत कल कुछ अलग थी दिल्ली के धुए और प्रदूषण को अपने ही तरीके से जोड़ कर मोदी सरकार पर एक धारदार आक्रमण विचारों का ,आंसुओ से लहुलुहान चंद कुछ सवालों के गाड़े रंग का ।

“ये कार्बन का काल हैं, ये आपात काल हैं “ अल्प शब्दों में राजनैतिक सन्देश सरकार को देने की कोशिश थी ।

बच्चे को भी पता हैं पी.एम् का मतलब , P.M 10 , P.M 2.5

ये  2.5 पी.एम् और भी खतरनाक ,घर पहुच भी पायेंगे या नहीं ,या सीधे अस्पताल पहुच जायेंगे ।  एक साहसिक टिपण्णी साहसी कलम ही कर सकती हैं ।

नचिकेता की कहानी बाप के दानवीर होने से नहीं नचिकेता के सवाल से जानी जाती हैं जिसके सवाल ने भ्रम तोड़ दिया ,जिसने एक मासूम सवाल किया था ,”पिताजी आप  बूढ़ी गाय तो दान करते हो अच्छी गाय अपने पास रखते हो ,मुझे दान करना होगा तो किसको करोगे ?”

मासूम नचिकेता ने पिता के ढोंग से पर्दा उठा दिया सवाल करके ,की आपने कहा कुछ कर और कुछ रहे  हो ? “

आज रविश ने वही सवाल सरकार से नचिकेता बन कर पूंछ लिया ,विचारों का गोला दाग दिया ,अपना विरोध जता दिया उसका कारण भी सरकार को बता दिया ।जिसने NDTV  को एक दिन के लिए बेन करने का नोटिस दिया हैं ।

बिना कोई सवाल किये रविश ने प्राइम टाइम पर सवालों का जखीरा खाली कर दिया ,बता भी दिया, सवाल प्रत्यक्ष नहीं तो चुप रह कर भी किये जा सकते हैं ।

मीडिया के सामाचार चेनलो पर पत्रकारों की  भीड़ बहुत हैं ,तेज़ तेज़ आवाज में सवाल पूंछने वाले पत्रकार हैं जिनकी डिबेट आप सुनो तब आपका ही रक्त चाप प्रभावित होने लगे ,कुछ ऐसे चाटुकार जो सरकारी सिंडीकेट का हिस्सा हैं । कोई x  हैं तो कोई y कोई z  की प्रतिस्पर्धा में हैं तो कोई पदम् श्री की ?

लेकिन उन सरकारी  सिंडीकेट वाले पत्रकारों का सम्मान अब नहीं ,लक्ष्मी और सरस्वती साथ कहाँ टिकती हैं ,इनको तो जन्मजात श्राप हैं ।

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indian national congress social media activist लेखक कवि सामाजिक चिंतक