राहुल गांधी निशाने पर क्यों हैं ?

संघी गिरोह एक बार झूठ , फरेब और चालू जुमलों के चलते सत्ता तक पहुँच गया। 31 फीसद लोगों ने इस भूल भुलैया को समझा नहीं और बहकावे में आ गए । दोष उनका नहीं, बहु दलीय व्यवस्था में यह सब होता ही रहता है। एक पार्टी अगर मुतवतिर सत्ता में रहेगी तो एकाधिकार वाद की तरफ बढ़ेगी। जनतंत्र को कायम रखना है तो तवे पर सिक रही रोटी को उलटना पलटना ही होगा। गिरोह आ गया। अब उसकी मंशा है आगे तक चलने की।

आगे बने रहने में कौन दल वाधक है?

कौन व्यक्ति अगली कमान थामने में सक्षम है?

इन दोनों प्रश्नो को हल करने बैठिये तो जवाब आता है कांग्रेस और राहुल गांधी।

इस जवाब को विस्थापित कैसे किया जाय? यह सवाल गिरोह को तंग कर रहा है। अगर कोइ राजनीतिक दल होता तो वह कांग्रेस की नीतियों के बरख़िलाफ़ बोलता या अपनी रणनीति तय करता, लेकिन चूँकि गिरोह का राजनीति से कोइ लेना देना नहीं है, इस लिए ये अपने पुराने चाल चलन और चरित्र को सामने रख कर राहुल गांधी पर हमलावर हुए पड़े हैं। इनसे कोइ भी सवाल पूछिये तो बगल झांकने लगेगें।

मसलन … राहुल गांधी की कार्यशैली गलत है क्या ?

राहुल गांधी गांव गांव बगैर किसी बख्तरबंद गाड़ियों के काफिले से निकल जाते हैं, गलत है क्या ?

राहुल गांधी ने राजनीति में सुचिता और अपराधी करन के खिलाफ लाये जानेवाले प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से फाड़ कर फेंका यह गलत था क्या?

आज जब राजनीति जरायम पेशा के खाने में खड़ी की जा रही है और संसद अपराधियो का अड्डा बन रहा है तो किसी को तो सामने आना होगा ये सब बचाने के लिए।

राहुल गांधी ने यह जोखिम उठाया तो गलत रहा क्या?

भूख जो देश का बड़ा सवाल बना हुआ था उसके खिलाफ अपनी सरकार पर दबाव दाल कर अन्न सुरक्षा क़ानून का मसला हल किया यह गलत था क्या?

भीड़ से हट कर कभी संजीदगी से इन प्रश्नो का हल सोचिये तो जवाब एक ही आता है राहुल गांधी। लेकिन आज संदूक बन्दुक और डिब्बा तीनो ने मिल कर राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इसका जवाब देश का नौजवान , किसान , और वे तमाम लोग देगें जो मजबूर हैं , मजलूम हैं लेकिन अपने बारे में और देश की बेहतरी के बारे में सोचने लगे है। वे सब इन्तजार कर रहे हैं वक्त का।Rahul-Gandhi

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