मैं गुजरात बोल रहा हूँ,

मै साबरमती के संत का गुजरात बोल रहा हूँ, मैंनें दुनिया को अहिंसा का पाठ पढाया है,

मैं सरदार के अरमानों का गुजरात बोल रहा हूँ, मैंने देश को सदैव एकजुट रहना सिखाया है,

मैं जीवराज नारायण के सपनों का गुजरात बोल रहा हूं, मैनें देश को तरक्की की राह पर बढाया है,

मैं वर्गीस कुरियन की मेहनत का गुजरात बोल रहा हूँ,मैनें देश को सफेद क्रांति से सींचा है,

मैं माधवसिंह की तटस्थता का गुजरात बोल रहा हूँ,मैनें देश को हर हालात में सामान्य रहना सिखाया है,

मैं धीरूभाई का गुजरात बोल रहा हूँ, मैनें दुनिया को कम संसाधन में बड़ा व्यापार करना सिखाया है,

मै महिलाओं के संकल्पों का गुजरात बोल रहा हूँ, मैने दुनिया को सिखलाया है मेहनत करना,आगे बढना।

हां मैंनें बुरे दौर भी देखें हैं, मैंने मंदिरों पर हमले देखें हैं, मैंनें देखा है अपने बेटों को आपस में लड़ते हुए, उनको एक दुसरे से चिढ़ते हुए,झगड़ते हुए, लेकिन मैं डिगा नहीं अपने लक्ष्य से, मैंने देखा है अच्छे दौर को भी,बुरे दौर को भी।

मैंने देखा है अपने पार्टीदार बच्चों को हक की मांग करते वक्त मारे जाते हुए,

मैने देखा है ऊना में मेरे दलित बेटों को पीटे जाते हुए,

मैनें देखा है नोटबंदी की कतारों में बुजुर्गों को बिलखते हुए,बहु बेटियों को मरते हुए,

मैनें देखा है जीएसटी से अपने व्यापारी बेटों का व्यापार उजड़ते हुए।

बहुत दिनों से चुप हूं, लेकिन अब मुंह खोल रहा हूँ,

मैं दर्द से बिलख रहा गुजरात बोल रहा हूँ,

अब वापस सत्य, सुमार्ग और विकास की राह खोल रहा हूँ,

हां, मैं आपका गुजरात बोल रहा हूँ ।

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