National बुलेट ट्रैन – दिखावटी सफर

बुलेट ट्रैन – दिखावटी सफर

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भारत की वर्तमान स्थिति से ज़्यादातर नागरिक भली भांति ज्ञात है पर दिल्ली में बैठे आक़ा इस बात से इत्तेफाक नही रखते होंगे ।ज़्यादा समय नही बीता हैं उन बातों को जब हम उन प्रगतिशील देशों में गिने जाते थे जो तीव्र गति के विकास के रथ पर सवार थे,हुआ यूं की अचानक एक इस अप्रत्याशित एवम अदृश्य गड्ढा आया जिसका नाम है विमुद्रिकरण ,उस गड्ढे में आम आदमी का कुछ ऐसा गिरना हुआ की उठना मुश्किल सा हो गया।देश हित मे तपती धूप में खड़ा होना मंज़ूर हुआ,बेटी की शादी में व्यवधान सहने पड़े,लोगों की जान तक गई। प्रसिद्ध हफिंगटन पोस्ट के अनुसार विमुद्रिकरण के 6 माह बाद भारत की विकास दर 2.2 प्रतिशत से घटी।खैर बड़ी गाड़ियों में बैठने वाले तथा एसी की हवा खाने वाले को क्या फर्क पड़ा होगा।
बढ़ते हैं अगले साल की ओर जब भारतीय प्रधानमंत्री जापानी समकक्ष भारत पधारे,तब भारत की प्रथम बुलेट ट्रेन का एलान किया गया,जिसका प्रस्तावित मार्ग है अहमदाबाद -मुम्बई और कीमत 1,10,000 करोड़ रुपये ,बहुत लोग तो शून्य भी न गिन पाएं(खैर शून्य का ज्ञान करवाने पर सरकार का ध्यान भी नही),शायद चादर से ज़्यादा पांव फैला लिए गए हैं।
सोचिए जिस देश मे ट्रैन की लेट होने की औसत 30मिनट से 1 घण्टा है ,और जब बिहार के रूट पर चलने वाली ट्रेन की बात की जाए तो यह औसत 105 मिनट हो जाती है। 7,RCR वालों को इस से भी कोई मतलब नही क्योंकि शायद समय की कीमत तो अहमदाबाद वाले लोगो की ही है। दौरे तो बहुत किये लेकिन सीख कुछ नही ली बस दिखावटी चीज़े ले आये,जापानी ट्रेनों की लेट होने की औसत करीब 10मिनट है वो भी वहां के यात्रियों के कारण।
शायद यह सारी परिस्थितियों को ख्याल में रखते हुए पदमश्री ई श्रीधरन, जो की मेट्रोमैन के नाम से प्रख्यात है तथा जिन्होंने भारत के रेल गतिविधियों में बड़ा योगदान दिया ,उनके शब्द कुछ ऐसे हैं “मुझे नही लगता की भारतीय रेल कोई खास प्रगति की राह पर है” .जब उनसे बुलेट ट्रेन पर सवाल पूछा गया तो उनका कहना था की “यह अमीर वर्ग की ट्रैन है,बहुत ही महंगी होने के कारण यह आम लोगों के लिए उपयोगी नही हैं,भारत को आधुनिक,साफ,सुरक्षित एवम तेज़ रेल सेवा की आवश्यकता है।
वाकई में ई श्रीधरन ने एक आम आदमी की मुंह की बात कह दी! एक साधारण व्यक्ति जिसका सप्ताह में भी एक दिन भी रेलवे से जुड़ा काम होता है वह यह समझता होगा की बुलेट ट्रेन एक मिडिल क्लास परिवार में उस फरारी गाड़ी जैसी है जिसे बाकी सारे ज़रूरत के खर्चो से पहले प्राथमिकता दे कर खरीदा गया हो तथा उसका उपयोग भी बहुत खर्चीला है।
खर्चे की बात की जाए तो बुलेट ट्रेन पर आने वाला खर्चा करीबन एक लाख दस हज़ार करोड़ रुपये निर्धारित हुआ है जो की देखा जाए तो 2017 के कुल रेल बजट का लगभग 84प्रतिशत है।साथ ही यह लागत 2017 के ही कुल स्वास्थ्य बजट का दुगुना है।
जिस देश के ट्रेनों तथा स्टेशनों पर मूलभूत सुविधायों का टोटा हैं वह बुलेट ट्रेन देश के करोड़ो लोगो के मौलिक अधिकारों के ऊपर से गुज़रती हुई लगती है।जिस देश में आज भी लोग ऑक्सीजन गैस की कमी से लोग मर जाते हैं,वहां बस दिखावे के किये यह सब करना दयनीय है।
मुम्बई के एक RTI कार्यकर्ता श्री अनिल गलगली द्वारा एक लगाई गई एक RTI के जवाब में यह सामने आया की अहमदाबाद मुम्बई रुट पर यात्रीभार की क्षमता 7,06,446 है इनमे से सिर्फ 398002 सीट पर ही यात्री मिल पाते हैं।इन संख्याओं को मद्देनजर रखते हुए बुलेट ट्रैन का प्रस्ताव प्रासंगिक नही प्रतीत होता!
गरीबी में आटा गीला कर रहे हैं,शायद इन्होंने वो समय नही देखे हैं जब आटा भी मांग के लेना पड़ता था!

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