मोदी जी (इंटायर पोलिटिकल साइंस वाले) के बाएं हाथ और अर्थशास्त्र के बहुत ही बड़े महारथी श्री अरुण जेटली (इंटायर बी. कॉम वाले) का कहना है कि नोटबंदी धन को ज़ब्त करने की मुहिम नहीं थी बल्कि कैश इकॉनमी को गिराने, डिजिटाइज़ेशन बढ़ाने, टैक्स बेस बढ़ाने, और काले धन से लड़ाई थी।

शायद मोदी जी और उनके क़ाबिल मंत्री ये भूल गए कि भारत की 75% इकॉनमी कैश इकॉनमी है और 80% रोज़गार कैश इकॉनमी से ही आता है। जिसकी चूलें आपने हिला दी है बिना किसी दूसरी व्यवस्था को लाये इतने बड़े तबक़े के साथ ये क्रूर मज़ाक़ नहीं है तो फिर ये आपकी घोर अज्ञानता है।

शायद मोदी जी और उनके क़ाबिल मंत्री ये भूल गए कि जिस तबक़े में डिजिटाइज़ेशन को बढ़ावा देने की मुहिम है वहां शिक्षा की दर कम है और इंटरनेट की पहुंच भी सीमित और संकुचित है। एक बहुत बड़ा समूह अपनी फ़सल हाथ के हाथ बेच कर आता है और उन्ही पैसों से अगली फ़सल की बुआई करता है। और यही तरीक़ा दूसरे छोटे व्यापारी भी करते है डिजिटाइज़ेशन में हर बार ट्रांसक्शन फ़ी भी देनी है। जहां लाशें डंडों पे बांध कर, साईकल पर, ठेलों पर, क्रेन, पर ले जाई जा रही हो और वहां किसानों को चेक से पेमेंट दे कर बैंक की लाइन में लगाना इतने बड़े तबक़े के साथ क्रूर मज़ाक़ नहीं है तो फिर ये आपकी घोर अज्ञानता है।

शायद मोदी जी और उनके क़ाबिल मंत्री ये भूल गए कि टैक्स बेस तब बढ़ता है जब टैक्स रेट कम किया जाता है। प्रारंभिक जी एस टी की दो दरों में 18% और 28% कि दो और दरों को बढ़ा कर, पेट्रोल, डीज़ल और शराब को जी एस टी से हटाना टैक्स टेररोरिज़्म है। मार्किट के मार्किट ख़ाली पड़े है, रियल एस्टेट और इंफ़्रा धरातल पर है जी डी पी और इंडस्ट्रियल ग्रोथ लगातार नीचे जा रही है रेलवे की प्राइसिंग बढ़ चुकी है और जनता को अच्छे दिन दिखाना उनके साथ क्रूर मज़ाक़ नहीं है तो फिर ये आपकी घोर अज्ञानता है।

शायद मोदी जी और उनके क़ाबिल मंत्री ये भूल गए कि उन्होंने अपने भारी ज्ञान से काले धन को भी सफ़ेद धन बना कर 99% नोट बैंक में जमा करा दिए। जिसने नोट बैंक में जमा कराए हैं उनके पास उसका उचित प्रमाण भी होगा। दुनिया की कोई सरकार किसी के बैंक में जमा पैसों को अकारण फ्रीज़ नहीं कर सकती। जहां काले धन की फ़िगर अरबों खरबों करोड़ बतायी जा रही थी वहां 4172 करोड़ के काले धन की संभावना व्यक्त करना क्रूर मज़ाक़ नहीं है तो फिर ये आपकी घोर अज्ञानता है।

देश की ईंट से ईंट बजा दी गयी आप ख़ामोश रहे।

देश का अर्थतंत्र की चूलें हिला दी गयी आप ख़ामोश रहे।

नोट बंदी में 180 लोग लाइनों में मर गए आप ख़ामोश रहे।

रिज़र्व बैंक का सरकार को डिविडेंड आधा हो गया आप ख़ामोश रहे।

नोट बंदी में सरकार का 30000 करोड़ का ख़र्च आया आप ख़ामोश रहे।

आप बहुत अच्छे है। सच्चे है। देशभक्त है। इसलिए ख़ामोश रहे।

लेकिन गाय, लव जिहाद, आतंकवाद, कश्मीर, पाकिस्तान, मदरसा, वन्दे मातरम, तीन तलाक़, बहु विवाह, बारावफ़ात की छुट्टी जैसे ख़तरनाक़ मुद्दो पर कभी ख़ामोश मत रहिएगा। ज़ोर ज़ोर से बोलिये, चिल्ला चिल्ला के बोलिये, सांस उखड़ने लगे तो ऑक्सीजन सिलिंडर भी साथ रखिये पता नहीं कब ज़रूरत पड़ जाए।

“बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी था
हर शाख़ पे उल्लू बैठा है अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा”

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