8 नवम्बर की रात जब मोदी जी ने 500 और 1000 रुपये के नोट के विमुद्रिकरण का ऐलान किया तो मीडिया के एक विशेष वर्ग द्वारा इसे ऐतिहासिक और कालाधन पर “सुर्जिकल स्ट्राइक” की संज्ञा दे दी गई, लेकिन अखबार के रंगे पन्नों में किसी भी प्रख्यात अर्थशास्त्री का न तो संपादकीय लेख था और न किसी न्यूज़ चैनल के बहस में किसी अर्थशास्त्री को जगह दी गई थी। न्यूज़ चैनलों के बहस और अखबार के रंगीन पन्नों के पीछे एक प्रचारतंत्र था जो मोदी जी के किसी भी फैसले को ऐतिहासिक घोषित करने के लिए उसी समय व्यग्र हो जाता है।
अब आते हैं विमुद्रिकरण के फैसले पर। विमुद्रिकरण का अंग्रेजी में शब्द होता है Demonetization. Demonetization में एक शब्द छिपा होता है Demon जिसका हिन्दी में अर्थ होता है राक्षस, और चूंकि मोदी जी के भक्तों को हिंदी मान्यताओं में बहुत भरोसा है अतः इसे थोड़ा हिन्दू मान्यताओं से जोड़ते हैं।  रावण ने अपनी लंका सोने की बनाई थी और वह अपने उत्थान पर था, परन्तु उसने एक गलत निर्णय लिया – सीता जी के अपहरण का और वही उसके पतन का कारण बना। दूसरी बात की मोदी जी नोटबंदी के फैसले को यज्ञ बता रहे हैं और बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा करीब 100 लोगों की मौत को यज्ञ में आहुति की संज्ञा दे रहे। अब मुझे तो नही पता कि हिन्दू मान्यता में ऐसा कौन सा यज्ञ है जो राजा अपनी प्रजा की आहुति देकर सम्पन्न कराता हो।जैसे रावण का अभिमान ले डूबा ठीक इसी प्रकार मोदी जी ने भी झूठ , जुमले और पाखण्ड से 282 सीट जीतकर प्रचण्ड बहुमत के साथ जीत कर भारत की सत्ता पर काबिज हुए। उनके हर सही गलत फैसले को राष्ट्रवाद की चाशनी लगाकर मीडिया का एक वर्ग इसे लगातार ऐतिहासिक बताता रहता है। लेकिन यह फैसला ढेरों दुष्प्रचार के बावजूद मोदी जी के पतन का कारण बनेगा।
● विमुद्रिकरण का सबसे पहला फायदा यह बताया गया कि यह कालाधन पर करारा हमला है, लेकिन जिस दिन से यह फैसला लागू हुआ सरकार लोगों को यह समझाने में विफल रही है कि आखिर 1000 रुपये के नोट को बंद कर 2000 के नोट को जारी करने से कालाधन पर कैसे कोई हमला हो सकता है?
दूसरी बात जब यह फैसला कालाधन को पूर्णतः बन्द
करने के लिए लिया गया था तो फिर दूसरी बार एमनेस्टी स्कीम लानी की क्या जरूरत थी? कालाधन वालों को दूसरा मौका क्यों मिलना चाहिए जब गरीब और ईमानदार पूरे दिन लाइन में लगकर अपनी गाढ़ी कमाई को बैंक में बदलने पर मजबूर थे।
● विमुद्रिकरण का दूसरा फायदा यह बताया गया कि अब देश से जाली नोट खत्म हो जायेगा, लेकिन वास्तविकता में हुआ यह कि मोदी जी द्वारा “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम हेतु मंच पर सम्मानित व्यक्ति 2000 रुपये के जाली नोटों की छपाई करते हुए पकड़ा गया।
देश के अनेक हिस्सों से नए जाली नोट पकड़े गए। यहाँ तक की आरबीआई द्वारा प्रेषित नए 500 के नोट तीन अलग अलग प्रकार के छपे थे और जाली नोट के कारोबारियों के लिए यह सोने पर सुहागा साबित हुआ।
● अब जब भ्रष्टाचार और जाली नोट की बात जुमला साबित हुई तो बोला गया कि विमुद्रिकरण से आतंकवाद पर करारा प्रहार होगा परन्तु पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी हमलों में कोई कमी नही आई। अभी शनिवार को जम्मू कश्मीर के पंपोर में हुए आतंकी हमले में सेना के 3 जवान शहीद हुए। पिछले महीने आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में मृत आतंकियों के पास से 2000 के नए नोट बरामद हुए थे। जिन रुपयों के लिए आम लोग बैंक की लंबी कतारों में दिनभर खड़े हो रहे थे वो आतंकियों के पास इतनी आसानी से कैसे पहुंचे?
● अब सारे मुद्दों पर विफलता के बाद मोदी जी को नया आईडिया सूझा। भारत को कैशलेस सोसाइटी बनाने का। लेकिन इस कैशलेस सोसाइटी से देश को क्या फायदा होगा? सबसे पहले तो क्या हमारे पास ऐसी व्यवस्था है कि हम सुरक्षित कैशलेस व्यवस्था की ओर बढ़ सके? इस आर्थिक वर्ष के पहली तिमाही में ही ऐसी खबरें आई थी की लाखों की संख्या में डेबिट कार्ड की जानकारी विदेश में बैठे लोगों ने अवैध रूप से चोरी कर ली थी। आखिर तीन से चार महीने की अवधि में मोदी जी ने ऐसी क्या व्यवस्था दुरुस्त कर ली जो पूरे देश को कैशलेस बनाने पर जोर दे रहे हैं।
◆ अब बात जीडीपी में आने वाली गिरावट की, पूर्व प्रधानमंत्री और प्रख्यात अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह जी ने राज्यसभा में साफ़ कहा कि भारत के उभरते अर्थव्यवस्था पर मोदी जी ने ऐसा प्रभार किया है सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 2% तक की गिरावट आने का अनुमान है।तमाम आर्थिक सर्वेक्षण करने वाले संगठनों ने भी आशंका जताई है कि जीडीपी में गिरावट आएगी। इसका सबसे बुरा प्रभाव होगा समाज के उस निचले तबके पर जिसे यूपीए शाशनकाल में गरीबी रेखा से ऊपर उठाकर समाज की मुख्यधारा में शामिल कराया गया था। यह वर्ग अब वापस अपने घरों की ओर लौटने को मजबूर है क्योंकि फैक्टरियों और कल कारखाने बुरी तरह प्रभावित हैं।
◆ आंकड़ों से साफ़ है कि बिना किसी शोर सराबे के मनमोहन सिंह की के कार्यकाल के आखिरी दो वर्षों में देश के अंदर से अधिक कालेधन पर चोट पहुंचाई गई जितना मोदी जी ने ढोल नगाड़े पीटने के बावजूद भी नही किया।


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◆ भारत में 8 नवम्बर को तकरीबन 15 लाख करोड़ की रकम 500 और 1000 की मुद्रा में चलन में थी। आज CNBC AWAAZ की रिपोर्ट के अनुसार 14 लाख करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं जो कि विमुद्रित नोटों का 90% से ज्यादा है, जबकी 10 दिन अभी भी बाकी है जमा कराने के लिए और उसके बाद भी RBI मे 31 March तक जमा करा सकते है । यानी लगभग पूरे नोट वापस आ जायेंगे ।  CMIE (Centre for Monitoring Indian Economy) के रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी मे कुल लागत सवा लाख करोड़ रूपये से ज्यादा है । यानी बात साफ है कि नोटबंदी से सरकार को कोई आर्थिक लाभ नही होने वाला है, नुकसान ही होगा । कुछ लोगो का मानना है कि मोदी जी के पास अपनी कोई आर्थिक समझ नही है और उन्होंने गलत कदम उठाया है, लेकिन ऐसा सोचना गलत है। उनका यह कदम सोचा समझा हुआ है और सिर्फ और सिर्फ अपने व्यपारिक मित्रों के हितों को साधने के लिए लिया गया है!

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