देश पूछ रहा है आप कहाँ है …याद  कीजिये कुछ साल पहले पूरे देश में क्रांति फैला रखी थी  की लोकपाल चाहिए लोकपाल …सिर्फ लोकपाल वो भी ओरिजिनल वाला लोकपाल ..रामलीला मैदान से मोमबत्ती मार्च तक सब किया इस लोकपाल के लिए, कांग्रेस की सरकार थी जिसको लोकतंत्र पर पूर्ण विश्वास था और इसी लिए कांग्रेस सरकार ने जनता की मांग को समझते हुए लोकपाल को संसद के दोनों सदनों से पास करवाया  तब आप बहुत खुश थे आखिर जीत मिल गयी थी आपके आंदोलन को ।
अब नयी सरकार आ गयी मोदी सरकार आ चुके हुए 3 साल हो गए .. आपने पूछा क्यों नहीं की क्यों अब तक लोकपाल की नियुक्ति नहीं हुयी क्यों लोकपाल जिस स्वरुप में पास हुआ था वो लागू क्यों नहीं हुआ।
आप 3 साल से खामोश रहे क्योंकि आपको किसी ने लोकपाल की याद तक नहीं दिलवाई । अब कौन याद दिलवाये भला जिन जिन लोगों के पीछे आप आंदोलन कर रहे थे वो सब तो फूल सेटल हो चुके है । कोई मुख्यमंत्री है और साथ में कई मंत्री भी, कोई केंद्रीय मंत्री और कोई राज्यपाल और बहुत से चेहरे परदे के पीछे से सेटल हो चुके है इसलिए वो न लोकपाल लोकपाल चिल्ला रहे हैं और आपका क्या आप तो वैसे भी खुद कुछ नहीं सोच सकते आपकी क्रन्तिकारी सोच whatsapp से शुरू होती है और वही ख़त्म । हो सकता है कभी कोई whatsapp पर मेसेज आ चुका हो जिसके अनुसार लोकपाल नियुक्त होकर काम कर रहा हो और अपने बिना सोचे समझे यकीन भी कर लिया हो । इसलिए आप लोकपाल को भूल चुके है , आपकी जानकारी के लिये बता दिया जाये की अभी जल्दी ही सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में साफ़ साफ़ कहा है कि वो लोकपाल अभी नहीं नियुक्त कर सकती।
अब आप सोच रहे होंगे ये कैसे मुमकिन है आपकी मोदी सरकार तो भ्रष्टाचार पर बहुत सख्त है तो लोकपाल के लिए क्यों मना करेगी जी ज़रूर सोचिये मगर थोड़ा पीछे जाकर .. याद कीजिये मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्त्री थे 10 साल तक उन्होंने प्रदेश में लोकायुक्त नहीं नियुक्त किया और  टालते रहे जब राज्यपाल ने संविधान के हवाले से लोकायुक्त की नियुक्ति की तो मोदी जी पूरी तरह से नाराज़ हो चुके थे और उस फैसले को बदलने के लिए करोड़ों खर्च कर हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक गए मगर बात न बनी और राज्यपाल का फैसला माना गया खैर मोदी जी तो मोदी जी ही थे  उनको ये बात कैसे हजम हो सकती थी की फिर क्या था उन्होंने पूरे लोकायुक्त कानून में ही बदलाव कर दिया और कानून के मुताबिक मुख्यमंत्री की पसंद का लोकायुक्त ही काम करेगा मतलब साफ था कि गुजरात में मुख्यमंत्री और मंत्रियो के भ्रस्टाचासर की जाँच निष्पक्ष नहीं हो सकती थी।
अब वापस आते लोकपाल पर क्यों भला मोदी जी लोकपाल नहीं लाना चाहते क्या डर है उनको ? हाल ही में आपने प्रधानमन्त्री के सहारा द्वारा रिश्वत लेने का आरोप की बात सुनी होगी वो आरोप लगा और बिना जाँच मामला शांत सोचिये लोकपाल होता तो क्या जाँच न होती और पिछले दिनों कई राज्यों में कितने ही मंत्रियों के ऊपर आरोप लगे मगर जाँच के लिए कोई निस्पक्ष संस्था नहीं थी इसलिए बात आई और गई ।
सवाल आपका है कि आप क्या है सच्चे देशभक्त या भेड़ चाल का हिस्सा,  भेड़ चाल का हिस्सा इसलिए कहा कि आप खुद कुछ नहीं सोच रहे बल्कि वही सोच और कह रहे हैं जो कुछ लोग आपको सोशल मीडिया के ज़रिये कहलाना चाहते है । खुद सोचिये आपने जो लोकपाल के लिए आंदोलन किया था वो देश के लिए था, देश का भ्रस्टाचार मिटाने के लिए था या एक 130 साल पुरानी देश की आज़ादी के अन्दोलन वाली कांग्रेस पार्टी की सरकार हटाने के लिए था ,आपके सहारे कुछ लोग केंद्र में तो कुछ राज्यों में सरकार बना बैठे है और रहे आप तो वही जहा हमेशा है क्योंकि पोपट बन चुके है आपके सामने जुमला कह दिया जाता है और आप शांत रहते है आखिर क्यों इतनी पढाई लिखाई किस लिए की कोई भी आये और आपका इस्तेमाल करे और राजनितिक लाभ उठा ले  …सोचिए आपको अपने पैसों के लिए लाइन में कई दिनों तक घंटों लगना पड़ा मगर आप चुप रहे क्योंकि किसी ने आपको whatsapp पर बताया की ये देश के लिए है और आप खामोश रहे , आपने २०० रुपया दाल खरीदी महंगा  पेट्रोल आज भी खरीद रहे हैं मगर चुप है क्योंकि कोई आपको लगातार whatsapp पर बता रहा है की महंगाई घट गयी है  और आपने मान भी लिया । सोचिये किन किन मुद्दों और नीतियों के लिए आपने सरकार चुनी और कितने जुमले मिले
कहा जाता है की भेड़ों का पूरा झुड केवल एक भेड़ के पीछे पीछे चलता रहता है आगे वाली भेड़ कहा जा रही पीछे वाली को पता ही नहीं होता वो केवल पीछे पीछे चलती रहती है , अब सोचिये इतना शिक्षा के बाद भी क्या आप भी भेड़ चाल का हिस्सा तो नहीं  कोई  आपके आगे चलता रहा और आप वही करते रहे जो उसने अपने फायदे के लिए आपसे करवाया
यकीन है अब भी आप नहीं सोचेंगे क्योंकि न तो कहीं भारत माता की जय बोला गया और न कहीं देश भक्त सैनिकों का जिक्र हुआ और तो और ये whatsapp पर भी नहीं पढ़ रहे …कुछ जो समझदार थे वो समझ गए और कुछ समझते हुए भी व्यक्ति प्रेम में जकड़े होने के कारण समझना नहीं चाहते ।
जय हिंद ।
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Graphic Designer & Web Developer, Interested for reading & writing about Social & political Issue