ये देश हमारा है तभी बोल रहे., ..क्या फर्क़ पड़ गया सर्जीकल स्ट्राइक  से? कौन सा बदलाव नज़र आ रहा? ख़त्म हो गए आतंकी हमले? ख़त्म हो गया आतंक? हर तरफ शांति हो गई? देश अब बहुत तरक़्क़ी कर रहा? अब हमारा कोई सैनिक शहीद नहीं हो रहा? अब कोई सैनिक अपाहिज नहीं हो रहा? अब किसी सैनिक का परिवार उजड़ नहीं रहा? सोचियेगा अगर सोच है तो ,नहीं तो देशभक्ति के नाम पर रोज़ शहीदों के शहादत की न्यूज़ सुनिए, अपडेट रहना चाहिए, कितने सैनिक हमारे आतंकियों की भेंट चढ़ गए हिसाब रखना ज़रूरी है,  आखिर हमारा देश अभी-अभी दबंग खान सलमान हुआ है, अभी-अभी हमने बहुत मज़बूत प्रधान मंत्री के चलते सर्जीकल  स्ट्राइक करके पाकिस्तान को जवाब दिया है, आप बस गर्व कीजिये कि सेना का दमख़म अब जा कर नज़र आया है, इससे पहले तो सेना बॉर्डर पर टाइम-पास करती थी विविधभारती पर फरमाइशी कार्यक्रम सुनकर, आज से पहले तो अगर सेना कुछ करना चाहती भी थी तो उसके तोप के सामने सरदार मनमोहन सिंह खड़े हो जाते थे ,….येहि कहना चाहते हैं ना आपलोग और येहि सुनना भी चाहते हैं , और अगर ऐसा नहीं कहा तो हम सेना का अपमान करने वाले ,उसके साथ देश का अपमान और उसके साथ सरकार का अपमान करने वाले देशद्रोही कहलायेंगे ?

क्या साबित करने की कोशिश की जा रही है आखिर! क्या सोच का दायरा बन रहा है आखिर!

सर्जीकल स्ट्राइक को ऐसा बताया जा रहा जैसे युध्द में विजय प्राप्त हुई हो…, अरे हल्ला नहीं मचाया होता तो शायद पाकिस्तान आये दिन आतंकी हमले जैसी  हिमाक़त करने में डरता भी और कौन सा ऐसा परिवर्तन दिख रहा जिसपर बोलते ही सब देशद्रोही और सेना के अपमान के दायरे में आ जा रहे…एक सर्जीकल स्ट्राइक को युध्द में विजय ना समझे,…और समझे! ..समझें कि ऐसे कई और स्ट्राइक्स की ज़रुरत है ,…लेकिन एक बात और  सुन लीजिये इतना ड्रामा कर दिया है  इस सरकार ने, इतना ढिंढोरा पीट दिया है  कि अब सेना कर भी ना पायेगी ऐसी सर्जीकल स्ट्राइक्स जल्दी…येहि सच है फिलहाल का…जाइये भांड मीडिया पर नज़रें गाड़े रहिये ….देशभक्ति का अब येहि दायरा रह गया है।

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