एक गाथा “साहस, संघर्ष और सफलता की”

ये कहानी है उन दो वीरांगनाओ की और कुछ जांबाजों की जिन्होंने साहस किया संघर्ष करने का और गुरमीत राम रहीम इंसा के साम्राज्य का सर्वनाश कर दिया। एक ऐसे शैतान के खिलाफ लड़ा जिसका एक साम्रज्य था, जो महलो मे रहता था, जो लाखो लोगो के लिए भगवान था, समाज का मसीहा था, जिसके करोड़ो अंधभक्त थे, जिसके मात्र कह देने से प्रदेश की सरकार बन जाया करती थी जिसके पास जाकर राजनेता नतमस्तक हो जाते थे, तमाम बड़ी हस्तियां भी जिससे मिलने को तरसते थे, जिसके मात्र एक इशारो से पूरे देश मे दंगे हो जाते हो, जिसके खिलाफ किसी को कुछ बोलने पर मौत के घाट उतार दिया जाता था।

कहानी के मुख्य पात्र:-

1- गुरमीत राम रहीम
2- 5 वकील
3-रामचंद्र छत्रपति
4- मुलींजा नारायण
5- डीएसपी सतीश डागर
6- जज जगदीप सिंह
7- दोनो वीरांगनायें

कहानी:-
डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को गुमनाम पत्र मिला था। यह पत्र राम रहीम की एक शिष्या ने भेजा था।

2002 : गुरमीत राम रहीम सिंह के एक महिला शिष्या ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एवं पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को गुमनाम पत्र लिखकर बाबा राम रहीम पर दुष्कर्म का आरोप लगाया।

जुलाई, 2002 : पूर्व डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की जुलाई, 2002 में रहस्यमय तरीके से हत्या कर दी गई। सिंह की हत्या डेरा के कार्यकर्ताओं द्वारा की गई, क्योंकि वह संप्रदाय के मुख्यालय में चल रही सारी गतिविधियों के बारे में जानते थे।

अक्टूबर, 2002 : सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की डेरा के कार्यकर्ताओं द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई। उन्होंने अपने स्थानीय अखबार ‘पूरा सच’ में सिरसा के पास स्थित डेरा के मुख्यालय में चल रही संदेहपूर्ण गतिविधियों के बारे में लिखा था।

नवंबर, 2003 : डेरा प्रमुख द्वारा साध्वियों के साथ किए गए दुष्कर्म के मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने CBI को जांच के आदेश दिए।

दिसंबर, 2003 : डेरा प्रमुख के खिलाफ CBI ने जांच शुरू की।

जुलाई, 2007 : दुष्कर्म मामले में डेरा प्रमुख के खिलाफ CBI ने आरोप-पत्र दाखिल किया।

2007-17 : दुष्कर्म मामले में 10 साल के दौरान करीब 200 बार सुनवाई हुई। निचली अदालत (पहले अंबाला और हरियाणा में स्थित) द्वारा दी गई जमानत पर डेरा प्रमुख जेल से बाहर रहे।

डेरा प्रमुख ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिस कारण ट्रायल कोर्ट (विशेष CBI अदालत) में चल रही सुनवाई में देरी हुई।
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अगस्त, 2017 : ट्रायल कोर्ट में मामले की सुनवाई समाप्त हुई। कोर्ट ने दुष्कर्म मामले में 25 अगस्त को फैसले सुनाने का ऐलान किया और इस मौके पर गुरमीत राम रहीम सिंह को अदालत में हाजिर रहने को कहा गया। 25 अगस्त को बाबा को दोनो साध्वियों के बलात्कार का दोषी पाया गया। 28 अगस्त को अदालत ने फैसला सुनाया जिसमे 20 साल के सश्रम कारावास की सजा हुई।

1- गुरमीत राम रहीम (डेरा सच्चा सौदा प्रमुख)
अब इस नाम को और इसके करतूतों को पूरी दुनिया जान गई है। मानवता, धर्म और रिश्तों को शर्मशार कर देने वाला ये पाखंडी अब 20 सालो के लिए जेल मे है।
2- 5 वकील
लेखराज ढोंट, अश्विनी बख्शी, आरएस चीमा, रूपेश डागर, और राजें सच्चर। ये वो लोग हैं जिन्होंने लगातार15 सालो तक अपनी वकालत का कोई फीस लिए बिना दोनो साध्वियों का मुकदमा लड़ा और गुरमीत राम रहीम को उसके अंजाम तक पहुंचाया। जब इन लोगो को बारे में सोचता हूं तो बस इतना ही समझ मे आता है कि शायद ये देवदूत इसी काम के लिए आये हो।

3- रामचंद्र छत्रपति:-
गुरमीत राम रहीम पर हत्या का भी आरोप है। साध्वी से दुष्कर्म के मामले को सिरसा के लोकल सांध्य दैनिक ‘पूरा सच’ के संपादक रामचंद्र छत्रपति ने प्रमुखता से छापा जिससे हड़कंप मच गया। इतना ही नहीं जब साध्वी के भाई रणजीत सिंह की हत्या हुई तो रामचंद्र ने अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा मुखिया गुरमीत पर हत्या कराने का आरोप लगाते हुए खबर छापी।
24 अक्टूबर 2002 को छत्रपति पर गोली चली, जिसमें वो घायल हो गए। 21 नवंबर 2002 को सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मौत हो गई। मगर वो जाते जाते दुनिया को सच बता गए और अपना जीवन सार्थक कर चुके थे।

4- मुलींजा नारायण:-
सितंबर 2002 में जब दिल्ली और हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामले की जांच सौंपी उस वक्त मुलिंजा नारायणन दिल्ली में बतौर डीआईजी (स्पेशल क्राइम) तैनात थे. मुलिंजा ने बताया कि 12 दिसंबर 2002 को सीबीआई द्वारा केस रजिस्टर करने के फौरन बाद उन्हें सीबीआई के एक सीनियर अधिकारी ने राम रहीम के खिलाफ केस को तुरंत बंद करने और किसी के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेने का फरमान सुनाया.
हालांकि इस सीनियर अधिकारी की सलाह को नकारते हुए नारायणन ने मामले को और गंभीरता से लिया और राम रहीम से जुड़े कई पहलुओं को खंगाला. इसके बाद भी कई सीनियर अधिकार और नेता लगातार सीबीआई ऑफिस पहुंचकर मामलो को बंद करने का दबाव डालते रहे. लेकिन कोर्ट की निगरानी के चलते राम रहीम के खिलाफ जांच अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंची और सीबीआई राम रहीम को आरोपी साबित करने में सफल हुई.

5- डीएसपी सतीश डागर:-
सतीश डागर नहीं होते ये लोग (गवाह) खौफ का सामना नहीं कर पाते सतीश डागर पर भी बहुत दबाव पड़ा, मगर वे नहीं झुके. बड़े-बड़े आईपीएस ऐसी हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं मगर डीएसपी सतीश डागर ने कमाल का साहस दिखाया है. दिसंबर, 2003 को इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई और सतीश डागर ने जांच शुरू की. सतीश ने ही खोजबीन कर पीड़ित साध्वी को खोज निकाला और उसे अपना बयान दर्ज कराने के लिए तैयार किया. साध्वी को बयान देने के लिए तैयार करना भी सतीश के लिए बड़ी चुनौती थी, क्योंकि इस बार दुश्मन किसी छोटे-मोटे देश की सराकर से भी ज्यादा ताकतवर था ।

6- जज जगदीश सिंह:-
रेप केस में दोषी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को रोहतक जेल में जज जगदीप सिंह ने सजा सुनाई। राम रहीम को 15 साल पहले 2002 में एक लड़की के साथ बलात्कार के आरोप है। राम रहीम सिंह को कोर्ट ने IPC की धारा 376, 511 और 506 के तहत कुल 20 साल की सजा सुनाई है।

जगदीप सिंह हरियाणा के रहने वाले हैं। उनकी लॉ की पढ़ाई पंजाब यूनिवर्सिटी से हुई है। जगदीप की पहली पोस्टिंग सोनीपत में हुई थी और सीबीआई कोर्ट में उनकी दूसरी पोस्टिंग है। जगदीप ने साल 2012 में सोनीपत में हरियाणा ज्यूडिशियल सर्विस ज्वाइन किया था। इसके बाद उन्हें पिछले साल CBI कोर्ट का स्पेशल जज बनाया गया। बतौर ज्यूडिशियल ऑफिसर ये उनकी दूसरी पोस्टिंग है। सीबीआई कोर्ट में पोस्टिंग वैसे कई जांच होने के बाद की जाती है लेकिन जगदीप की काबिलियत की वजह से उन्हें हाईकोर्ट ने एक ही पोस्टिंग बाद CBI कोर्ट की जिम्मेदारी सौंपी दी।

7- दो वीरांगनाएं (दोनो साध्वियाँ)
इस पूरे मामले में उन दो साध्वियों के साहस को सलाम हैं, जिन्होंने धमकी, दबाव के बावजूद अदालत का दरवाजा खटखटाया। दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत एक गुमनाम खत से हुई थी, जिस पर आज राम रहीम फंसे हुए हैं। उन पर रेप का आरोप एक खत से लगा था। ये खत 13 मई 2002 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लिखा गया था। इस खत में एक लड़की ने सिरसा डेरा सच्चा सौदा में गुरु राम रहीम के हाथों अपने यौन शोषण का किस्सा बताया था। हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की गई थी। अदालत के आदेश पर वर्ष 2001 में पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने सारी रिपोर्ट सीबीआई की विशेष अदालत पंचकूला को सौंप दी थी ।
इस बीच साध्वी डेरा से तमाम दबाव के बीच कोर्ट में गवाही देती रही ।
जब ये लोग वहां सुनवाई के लिए जाते थे तब वहां भी बाबा के समर्थकों की भीड़ आतंक पैदा कर देती थी. हालत यह हो गई कि जिस दिन सुनवाई होती थी और बाबा की पेशी होती थी उस दिन अंबाला पुलिस लाइन के भीतर एसपी के ऑफिस में अस्थायी कोर्ट बनाया जाता था. छावनी के बाहर समर्थकों का हुजूम होता था. ऐसी हालत में उन दो साध्वियों ने गवाही दी और डटी रहीं, आसान बात नहीं उस बाबा के खिलाफ जिससे मिलने कांग्रेस. भाजपा के बड़े-बड़े नेता सलामी देने जाते हैं.
।।।ऐसे साहस को सलाम।।।

जिस दिन अदालत ने इस बाबा के ऊपर बलात्कार के आरोप तय किये उस दिन देश के 5 राज्यो मे हिंसा हुई। लाखो लोग एक बलात्कारी के समर्थन में सड़कों पर उतर आए , दंगे हो गए 300 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ 50 लोग मारे गए 1000 लोग घायल हो गए। पर कोई भी उन दो साध्वियों, उन दो देश की बेटियों के समर्थन में नजर नही आया। जिस दिन आरोप तय हुए तब से सजा सजा सुनाई गई उस दिन, और आज तक मैंने सोशल मीडिया की हर साइट खंगाल ली लेकिन किसी भी राजनीतिक दल का या किसी नेता का किसी मुख्यमंत्री न प्रधानमंत्री न किसी राज्यपाल का इन बेटियों के समर्थन में एक भी संदेश देखने को नही मिला।

न ही किसी न्यूज़ चैनल पर उनके समर्थन में कोई रिपोर्ट देखी। सभी न्यूज़ चैनल को चाहिए कि एक दिन उन दो बेटियो के नाम भी एक दिन प्राइम टाइम शो करे जिन्होंने तुम्हे गुरमीत सिंह जैसे प्रभावशाली व्यक्ति को अय्याश, बलात्कारी, ढोंगी, शैतान कहने का साहस दिया।
एक बार फिर से उन बेटियों को सलाम।।।

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मेरी सोच है पत्रकारिता स्वतंत्र होनी चाहिए। मै कड़वा लिखता हूं क्यों कि सच लिखता हूँ। मेरे लेखों पर फर्जी सेकुलर भक्तो की भावना आहत हो सकती है। ऐसे लोगो को मेरे पोस्ट से दूर रहने की सलाह दी जाती है। मै आईना हूँ दिखाऊंगा दाग चेहरों के। जिसे नागवार लगे सामने से हट जाये।