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उन्नाव की घटना : हनक, हेंकड़ी और सत्ता का नशा

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उन्नाव की घटना हमारे समाजिक स्थिति के सम्बन्ध में काफी कुछ बोलती है l बलात्कार जैसे संगीन मामले में तब तक प्रशासकीय वर्ग चुप्पी साधे रहता है जब तक की मामला पीडिता के मुख्यमंत्री आवास के सामने सपरिवार आत्मदाह तक नही पहुँच जाता l यह चुप्पी सत्ता की हनक और हेंकड़ी के नए स्वरूप को स्थापित करती है l

जिन “माननीय” विधायक के खिलाफ यूपी पुलिस साल भर तक सबूत नही जुटा सकी उन्हीं विधायक महोदय को कल 13 अप्रैल की सुबह 4 बजे सीबीआई हिरासत में लेने को मजबूर हो जाती है जब आधी रात को विपक्ष के नेता दिल्ली की सड़कों पर कैंडल मार्च लेकर निकलते हैं और उनके समर्थन में हजारों की संख्या में भीड़ जुटती है l मीडिया का वो वर्ग भी इस खबर को दिखाने के लिए मजबूर हो जाता है जिसके लिए मुख्यमंत्री निवास के सामने आताम्दाह की खबर कांग्रेसी नेताओं के छोले भठूरे प्रकरण के सामने गौण हो गई थी।

अब चूंकि माननीय विधायक इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार, विपक्ष और मीडिया का दवाब और सबसे अधिक जनता में मन में उपजे रोष के कारण गिरफ्तार तो कर लिए गए हैं लेकिन उनके हनक ने झकझोर दिया है न सिर्फ व्यवस्था को बल्कि उन्हें भी जो 56″ के सीने का दंभ भरते थे और उनकी भी जिनकी सरकार छुटभैये अपराधियों का एनकाउंटर करने में खुद को शेर समझ बैठी थी l

विधायक जी का बयान कि “तीन बच्चों की माँ के साथ कोई कैसे बलात्कार कर सकता है ?” यह जोरदार तमाचा था आपके, मेरे और हर उस व्यक्ति के चेहरे पर जो खुद को आधुनिक भारत के सभ्य समाज का हिस्सा मानता है l हम सबने वो तस्वीर देखी थी जब सेंगर मुख्यमंत्री योगी जी के आवास पर मुलाक़ात के बाद अपनी कुटिल मुस्कान के साथ बाहर निकलता है , यह मुस्कान राक्षसी अट्ठाहस थी जहाँ प्रशासन और कानून व्यवस्था को अपनी मुट्ठी में बांधे होने का गर्व झलक रहा था l

लखनऊ के एसएसपी आवास के बाहर 40 गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचना और मीडिया के सामने शेखी बघारना संविधान निर्माता बाबासाहब डॉ भीमराव आंबेडकर का खुला अपमान था l यह नंगई थी , उन विशेषाधिकारों का मखौल था जो किसी जनप्रतिनिधि को मिलते हैं जनसेवा करने के लिए l एसएसपी द्वारा परेशान होकर अपने निवास स्थान का मुख्यद्वार बंद कर लेना हम सब के समझने के लिए काफी है उस पीडिता के परिवार पर क्या गुजारी होगी जिसका मकान विधायक महोदय के आवस से सटा हुआ था और आखिर किस भय और डर के कारण पूरा परिवार आत्महत्या करने को मजबूर हो गया l

विधायक के सितम और प्रशासन की बेबसी का यह अंत नही था l पीड़िता के पिता को पुलिस हिरासत में पीट पीट कर मौत के घाट उतार दिया जाता है l शायद इसलिए की पीड़िता के पक्ष में उभर रहे विधायक के खिलाफ जनाक्रोश को दबाया जा सके लेकिन जैसा कि पौराणिक काल से होता आया है दुष्ट, अहंकारी और सत्तालोभी पक्ष चाहे कितना भी बलशाली और निष्ठुर हो उसे झुकना पड़ता है , सत्य के सामने हारना पड़ता है और इस मामले में भी विधायक का गिरफ्तार होना उस असत्य की हार की शुरुआत भर है l 

हनक, हेंकड़ी और सत्ता के नशे में मशगूल लोग शायद भूल जाते हैं की सत्ता की कुंजी सदैव जनता के पास होती है और यह काल्पनिक गुरूर के नशे में अपराध तभी तक संभव है जब तक जनता अपने अधिकारों और सामजिक जिम्मेदारियों से अनिभिज्ञ है l

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