बीजेपी ने सत्ता के लिए पैसा बहाया – राहुल गाँधी,

तो? आपके पास पैसे नहीं थे क्या?

आप भी पैसे खर्च करते..किस ज़माने में जी रहे हैं राहुल सर!

गांधी का ज़माना नहीं है, कि आपके कोई एक गाल पर थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल सामने रख दिया और फिर सामने वाला अपनी नज़रें निचे कर लिया…सब कीजिये,खूब कीजिये, यहाँ  नैतिकता से नहीं नाटक से पब्लिक खुश हो रही, आप भी वही कीजिये….काउन सा एथिक्स, कैसी नियत? कुछ नहीं, ओनली राजनीति कीजिये ,एक व्यापारी की तरह…जो बिक रहा उसे बेचिए और खरीदना है उसे खरीदिए….देश की क्या सोचना, आप भी हिन्दू-मुस्लिम-दलित-सवर्ण सबको बाँट दीजिये, क्या होगा, अधिक से अधिक देश पिछड़ेगा ही ना, पिछड़ जाये, किसको पड़ी है देश को तरक़्क़ी देने की, तो का आप अकेले ठेका लिए हैं?

नोट बंदी के बाद भी BJP करोड़ो का प्रचार कर गई लेकिन लोग ये समझ रहे कि गरीबों का फ़ायदा हुआ तो का अकेले मुर्ख बन्ने के लिए आप ही पैदा हुए हैं का? अरे आम जनता को जो चाहिए वो समझिये, फालतू में नेहरू गांधी या आंबेडकर मत बनिए….वही नेहरू जो सदन में दलितों,आदिवासियों के लिए ये कह कर आरक्षण का सपोर्ट किया था कि घर में कोई बच्चा अपाहिज हो तो हम उसका ज़्यादा ख्याल रखेंगे, और ये कहते उनकी आँखे नम हो गई थी…..ये बनना चाहते हो आप?? अरे राहुल जी अब उस अपहिज बच्चे को पंख मिल चूका है ,आज वो नेहरू को गाली देता है….वाक़ई पप्पू वाली सोच है आपकी…आप भी रोइये जनता के बिच लेकिन अपने लिए ……

अच्छा बताइये! आपने इतना माथा फोड़ा भूमि अधिग्रहण बिल के लिए और उसको बचा भी लिया लेकिन किसान समझा क्या कि उसकी भूमि आपके संघर्ष ने बचाई? नहीं समझा ना….तो अब भी आप ना समझे?

समझिये, किसान मस्त है, BJP वालों ने कहा ना कि किसान अपनी पर्सनल लाइफ के झमेले में आत्महत्या करते हैं तो वही सही है..

समझिये राहुल जी,आप बिना मतलब मोदी जी का सूट नीलाम करवा दिए और ग़रीबों को नाराज़ कर दिया….ग़रीब इस बात से खुश है कि मेरा नेता खूब वादे करता है, ….आप भी कीजिये लेकिन अमीरों को साथ लेकर ।

समझिये, समझिये कि इमांदारी का मतलब है ” इमा है दुनियादारी” ।

 

मौसमी पाण्डेय

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