कभी कभी अतिथियों का सत्कार भी कुछ इस तरह होता है की वो एक घटना बन जाती है, चाहे आदर हो या निरादर, कभी आदर इस तरह हुआ की स्वागत गीत हमारा राष्ट्रीय गान बन गया, और निरादर इस तरह की शायद आने वाले वक़्तों मे भी यह याद रहे।
मुझे अच्छी तरह याद है जब मैं छोटा सा था और घर मे मेहमान आ जाते थे,मैं बहुत खुश हो जाता था वो इसलिए नही की मेरे घर मे बरकतें आएंगी,बल्कि इसलिए जब वो जाएंगे तो शायद 10-20 रुपये मिल जाएं,और बस फिर क्या था उनके जाने का काउंटडाउन शुरू, जाते जाते क़ो अगर पकड़ाते भी तो उसमे से कमीशन कट जाता हाथ लगते सिर्फ 1-2 रुपये खैर गरीब लड़के के लिए 2 रुपये ही काफी,तुरंत चल देता दादा जी वाली दुकान पर पारले जी वाली टॉफी लेने, अतिथि देवो भवः शायद मालूम भी ना था की किसे कहते हैं, अतुल्य भारत से भी अनजान,
धीरे धीरे बड़ा होता गया अपनी अतुल्यता को समझा,अतिथि सत्कार सीखा,लेकिन फिर भी दिल मे कहीं ना कहीं मेहमान जाने के बाद ये कसक रह जाती की शायद कहीं मेहमाननवाज़ी मे कोई कमी तो नही रह गयी,
——————————–
आज अजमेर की एक ऐसी घटना सुनने को मिली,जिसने वाक़ई सोचने पर मजबूर कर दिया की क्या होता है अतिथि सत्कार? कैसे की जाती है मेहमान नवाज़ी? हुआ ये की कुछ ब्रिटिश नागरिक अजमेर आये हुए थे,वहां लोगों ने ऐसा सत्कार किया उनका,की शायद हर भारतीय का सर शर्म से झुक जाय,पहले तो उनपर पत्थर मारे गए फिर उनके कपड़े फाड़े गए, जिन लोगों ने ऐसी शर्म नाक हरक़त की है मेरी नज़र मे वो किसी देशद्रोही से कम नही,आज उन्ही की वजह से भारत का सर झुक गया,भारतीयता शर्मसार हुई है, ज़रा सोचो जब वो अपने देश वापस जाएंगे तो क्या तस्वीर पेश करेंगे हमारे भारत की, कभी सोचा तुमने,की तुम्हारी ये हरक़त क्या तस्वीर बनाएगी उनके जहन में, क्या फिर कोई ब्रिटिश नागरिक दोबारा हिम्मत करेगा अजमेर जाने की, क्या फिर से कोई आएगा तुम्हारे अतुल्य भारत के नारे पर, बरबाद कर दिया है तुम्हारी नादानियों मे.
मैं जब दिल्ली मे इंजीनियरिंग की पढ़ाई करता था एक दिन अपने कुछ दोस्तों के साथ दिल्ली की जामा मस्जिद मे नमाज़ पढ़ने गया,वहां मैंने कुछ अंग्रेजों को देखा था जो तमाम भारतीयों के साथ मुस्कुराते हुए फोटो खिचवा रहे थे,उनका वो मुस्कुराता हुआ चेहरा उनसे ज़्यादा मुझे खुशी दे रहा था की आज जब ये अपने देश वापस लौटेंगे तो ज़रूर हम हिन्दुस्तानियों की मुहब्बत को याद करेंगे।।
लेकिन आज जब टीवी पर कुछ अंग्रेज़ों को रोते हुए देखा तो ऐसा लगा की शायद भारत माता आज अपने नालायक़ औलादों पर रो रही हो।
याद रखना उनके सर बहा खून का एक एक क़तरा,आंखो से गीरा एक एक आँसू क़र्ज़ की एक तरह एक बदनुमा दाग है हमारे देश के दामन पर।।

Comments